रुद्रपुर। सिडकुल के सेक्टर-2 स्थित इंटरार्क फैक्टरी की तालाबंदी के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी 500 कर्मचारी धरने पर डटे रहे। साथ ही श्रमिक संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने एसएसपी मंजूनाथ टीसी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं सुनाई। एसएसपी ने श्रमिकों को आश्वासन दिया।
इंटरार्क फैक्टरी में उत्पादन ठप होने से प्रबंधन ने गेट पर तालाबंदी कर दी है। इंटरार्क मजदूर संघ के बैनर तले अगस्त-2021 से नौ सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। संगठन के अध्यक्ष दलजीत सिंह ने कहा कि वे लोग ठेकेदारी प्रथा बंद करने, मांगपत्र पर समझौता करने, रुका हुआ बोनस और एलटीए का भुगतान करने व श्रमिकों से गैर कानूनी तरीके से हस्ताक्षर कराए गए कागजों को नष्ट करने आदि मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। आरोप लगाया कि कर्मचारी आंदोलन को कमजोर करने व मानसिक उत्पीड़न के लिए प्रबंधन ने तालाबंदी कर दी है, जबकि वर्तमान में कंपनी का उत्पादन ठीक चल रहा है। उन्होंने कहा कि होली से दो दिन पहले कंपनी ने 500 कर्मचारियों को बेरोजगार कर दिया है। वहां श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, सौरभ कुमार, नकुल कुमार, पंकज शर्मा, उदय सिंह, प्रमोद वर्मा, ललित मोहन, उमेश यादव, वीरेंद्र कुमार आदि थे।
इधर, कंपनी के एचआर हेड व एडमिन बीवी श्रीधर ने कहा कि उत्पादन कम होने से कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है जिस कारण कंपनी को लॉकआउट (कुछ समय के लिए बंद) किया गया है। सामान्य व्यवस्था होने के बाद कंपनी को खोल दिया जाएगा।
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सिडकुल में एचपी, एचसीएल, माइक्रोमैक्स समेत कई कंपनियां हो चुकीं बंद
रुद्रपुर। सिडकुल में अब तक कई राष्ट्रीय कंपनियां बंद हो चुकी हैं। बीते तीन साल के दौरान सिडकुल से एचपी, अमूल ऑटो, माइक्रोमैक्स, एचसीएल जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियां जा चुकी हैं, जबकि सिडकुल की स्थापना के बाद पिछले 19 साल में करीब 10 हजार लोग बेरोजगार हुए हैं।
रुद्रपुर में वर्ष 2003 में उत्तराखंड राज्य औद्योगिक विकास निगम (सिडकुल) की स्थापना हुई थी। सिडकुल की स्थापना के बाद यहां ब्रिटानिया, नेस्ले, बजाज, अशोक लेलैंड समेत 300 से अधिक कंपनियां स्थापित हुईं, लेकिन कई कंपनियों में अच्छा उत्पादन व व्यापार नहीं मिलने से उद्यमियों ने कंपनियां बंद कर दी हैं। श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी ने बताया कि सिडकुल से लैपटॉप व कंप्यूटर पार्ट्स बनाने वाली अमेरिका की एचपी कंपनी, मोबाइल व पावर बैंक बनाने वाली माइक्रोमैक्स कंपनी, टाटा की वेंडर रोजी ताशा कंपनी, अमूल ऑटो कंपनी, ईरा बिल्डिंग, डेल्फी टीवीएस, एक्मे व एस्कोर्ट कंपनियां बंद हो गई हैं। सिडकुल से उद्योग बंद होने पर करीब 10 हजार लोग बेरोजगार हुए हैं।
इधर, सिडकुल इंटरप्रेन्योर वेलफेयर सोसाइटी के उपाध्यक्ष श्रीकर सिन्हा ने कहा कि उद्योगों में उत्पादन व अच्छा व्यापार नहीं मिलने के चलते कंपनियां बंद हो जाती हैं। आने वाले समय में सिडकुल में और भी नई कंपनियों की स्थापना होगी जो युवाओं को रोजगार देने का प्रयास करेंगी।