उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग द्वारा लोहियाहेड जल विद्युत परियोजना को पानी की सप्लाई नहीं दी जा रही है, जिससे विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। पानी की सप्लाई के लिए सिंचाई विभाग ने नहरों की देखभाल और मरम्मत के एवज में परियोजना पर 1985 से 35 करोड़ के बकाए के साथ ही कई अन्य शर्तें रखी जा रही हैं। उत्पादन शुरू होने में कितना समय लगेगा यह बुधवार को लोहियाहेड जल विद्युत परियोजना और यूपी सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक में तय होगा।
31 अगस्त 2014 को परियोजना के डिफ्यूजर न खुलने से शारदा नहर के ओवरफ्लो होने से भारी तबाही मची थी और विद्युत उत्पादन ठप हो गया था। चार माह से अधिक समय के बाद जब विद्युत उत्पादन के लिए दो टरबाइनें तैयार हो गई हैं, मशीनों के संचालन के लिए दो सप्ताह से यूपी सिंचाई विभाग को 20 जनवरी से परियोजना को पानी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था, लेकिन मंगलवार को पानी नहीं मिल सका।
सूत्र बताते हैं कि यूपी सिंचाई विभाग ने डायवर्जन कर सूखी नहर से पानी ले जाने के बाद पुन: पानी की सप्लाई देने के एवज में कई शर्तें रखी हैं। बताया जाता है कि सिंचाई विभाग ने 1885 से अब तक के नहरों की मरम्मत और देखभाल के एवज में 35 करोड़ का बकाया बताते हुए भुगतान की बात की जा रही है। इतना ही नहीं पानी निकासी को बाईपास बनाए जाने के एवज में शर्त भी रखी जा रही हैं, जिसे पूरा करने के लिए न केवल भूमि बल्कि निर्माण के लिए भी एक से डेढ़ साल का समय और करोड़ों का बजट भी चाहिए जो विभाग के बजाय सरकार पर निर्भर करता है। उत्पादन ठप होने तक सब ठीक ठाक चलने के बाद अब शुरू करने में यह शर्तें क्यों? मतलब नदियां और पानी उत्तराखंड का और पानी की सप्लाई शुरू करने के लिए शर्तें यूपी की। डीजीएम सिंह ने कहा कि पानी मिलने के बाद विद्युत उत्पादन शुरू हो जाएगा और बाहरी काम चलता रहेगा।