गूलरभोज। उत्तराखंड और यूपी के किसानों की फसल सींचने के लिए बना हरिपुरा बांध अब सूखने की कगार पर पहुंच गया है। सूखा डाम अब पशुओं का चारागाह बन गया है। यही स्थिति रहने पर एक हफ्ते में डाम की भाखड़ा, खजिया नदियां बिल्कुल सूख जाएंगी। इससे यूपी को होने वाली पानी की सप्लाई बंद हो जाएगी।
सिंचाई विभाग के अनुसार हरिपुरा जलाशय 1970 के दशक से बना था। इसमें 795 फुट तक पानी की भंडारण क्षमता वाले हरिपुरा जलाशय में अब आधी सिल्ट भर चुकी है। पिछले एक माह से लगातार पानी सूख रहा है। आज की मौजूदा स्थिति में खजिया और भाखड़ा नाले में ही पानी रह गया है, जोकि खजिया, भाखड़ा सलूस के जरिए नदियों में सिंचाई के लिए छोड़ा जा रहा है।
किसानों का कहना है कि डिमांड के अनुरूप डाम से पानी नहीं मिल पा रहा है। किसान नंदाबल्लभ सती ने बताया कि उनकी गन्ने की फसल में वह बोरवेल कराकर इंजन के जरिए सिंचाई कर रहे हैं। वहीं किसान कुंवर सिंह ठकुराठी ने बताया कि उनके खेत में भी खजिया नहर से सिंचाई होती है। पानी के हालात देखकर उन्होंने भी बोरिंग करा ली है।
बौर, हरिपुरा जलाशयों के बीच कच्ची दीवार (कट) को बंद कर दूसरी जगह बनाने का लक्ष्य था कि हरिपुरा में पानी का भंडारण हो सके वह भी फेल हो गया। विभाग के अनुसार 783.5 फुट पर दोनों जलाशयों का वॉटर लेवल बराबर हो जाता है। हरिपुरा में आधी से ज्यादा सिल्ट भरे होने के कारण सीजन में पानी तो आता है, वह बौर में चला जाता है। इस डाम में मात्र कुछ पानी का भंडारण ही हो पाता है जो कि थोड़े समय ही रहता है। इस बार मई में ही जलाशय सूखने स्थिति में पहुंच गया है। ऐसी स्थिति किसानों की फसलों के लिए खतरनाक हो सकती है।
सिंचाई विभाग के अवर अभियंता प्रेम सिंह गंगोला ने बताया कि हरिपुरा जलाशय से यूपी की 13764 हेक्टेयर और उत्तराखंड की 10199 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई इन जलाशयों से होती है। बताया कि दोनों जलाशयों के बीच बनी कच्ची दीवार पर पुल बनकर गेट लग जाएं तो हरिपुरा का पानी इसी जलाशय में रुक सकेगा। इससे डाम का पानी नहीं सूखेगा।