रुद्रपुर। साइबर थाना पुलिस के हत्थे चढ़ा रविकांत शर्मा ने दिल्ली एनसीआर में कॉल सेंटर की नौकरी के दौरान बीमा पालिसी के नाम पर ठगी करने का ककहरा सीखा। शुरुआत में उसने छोटी-छोटी ठगी की और फिर वह बड़े स्तर पर ठगी को अंजाम दिया। कई राज्यों में ठगी कर चुका रविकांत उत्तराखंड की साइबर पुलिस से नहीं बच सका।
मूल रूप से मध्यप्रदेश के मोरेना जिले का रहने वाला रविकांत कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद शातिर अपराधी बन गया। साइबर पुलिस की पूछताछ में रविकांत ने बताया कि उसने दिल्ली एनसीआर में कॉल सेंटर में नौकरी की थी। यहां बीमा पालिसी को लेकर लोगों को कॉल कराए जाते थे। यहां से उसने कॉल करने के तरीके सीखे और निजी बीमा कंपनियों के एजेंट के संपर्क में आया था। उसने एजेंट से उपभोक्ताओं के नंबर हासिल किए और ठगी करने में जुट गया। बताया कि वह ट्रैवलिंग और ऑफरोडिंग का शौकीन है। लोगों से ठगी करने के बाद मिले रुपयों से शौक पूरे करता है। वह गो पालक है और फरीदाबाद स्थित दोमंजिले घर पर तीन गाय भी पाल रखी हैं। उसके दो बच्चे हैं, जो साथ में रहते हैं। सीओ एसटीएफ सुमित कुमार ने बताया कि आरोपी ने ठगी से हासिल रुपयों से संपत्तियां अर्जित की हैं। ऐसी संपत्तियों को चिह्नित किया जाएगा और जब्तीकरण की कार्रवाई भी होगी। संवाद
ठगी से बचाव के तरीके
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- अनजान व्यक्ति के बहकावे में आकर एनी डेस्क, क्विक सपोर्ट, टीम वीवर को डाउनलोड न करें।
- किसी लिंक के माध्यम से ओपन वेबसाइट पर बैंक व अन्य सोशल मीडिया साइट के लॉगिन आईडी व पासवर्ड न डालें
- अपने खाते की सुरक्षा के लिए अपनी प्रोफाइल को लॉक रखें।
- समय समय पर अपने पासवर्ड को बदलते रहें ।
- बहकावे में आकर किसी लोन एप्लिकेशन को डाउनलोड न करें ।
- सोशल मीडिया पर किसी अजनबी या किसी ऐसे व्यक्ति से प्राप्त संदेश का जवाब न दें
- कस्टमर केयर से बताकर फोन करने वाले व्यक्ति की बातों में न आये
- केवाईसी अपडेट/मोबाईल नम्बर बंद होने संबंधी मैसेज/फोन कॉल आने पर अपनी व्यक्तिगत/बैंक संबंधी जानकारी शेयर न करें।
- अंजान व्यक्ति/महिला से फेसबुक या किसी भी सोशल साइट पर दोस्ती का प्रस्ताव स्वीकार न करें।