जंगलों में रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेनों की चपेट में आकर हो रही हाथियों की मौत पर अंकुश लगाने की कवायद की जा रही है। वन विभाग और रेलवे के समन्वित प्रयासों से रुद्रपुर से पंतनगर और लालकुआं से किच्छा के बीच चयनित जगहों पर ट्रेनों की स्पीड 30 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। रेलवे की ओर से ट्रेनों की गति को लेकर आदेश जारी हो चुके हैं।
वन विभाग भी जीपीएस के साथ ही एनिमल डिटेक्शन सिस्टम को शुरू करने का प्रयास कर रहा है। जंगलों में बढ़ते इंसानी दखल और सिमट रहे जंगलों की वजह से हाथी कॉरिडोर बाधित हो रहे हैं। भोजन और पानी की तलाश में हाथी आबादी की ओर रुख कर रहे हैं।
जंगलों के बीच से बिछी पटरियों में दौड़ती ट्रेनों की चपेट में आकर हाथी जान गंवा बैठते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो दिसंबर 2017 में पंतनगर के हल्दी क्षेत्र में ट्रेन की चपेट में आकर दो हाथियों की जान चली गई थी। बीते 11 मार्च को लालकुआं के पास और 26 मई को नगला बाईपास के पास ट्रेन की चपेट में आकर दो हाथियों की मौत हो गई थी।
वर्ष 2016 में भी काशीपुर में ट्रेन की चपेट में आकर हाथी की मौत हो गई थी। ट्रेनों से हो रही हाथियों की मौतों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी थी। इसके बाद वन विभाग और रेलवे अधिकारियों ने बैठक करने के साथ ही हाथियों की मौत वाले स्पॉट चिह्नित किए थे। वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि वन विभाग और रेलवे के समन्वित प्रयास से चिह्नित जगहों पर ट्रेनों की स्पीड लिमिट 30 किमी प्रति घंटा होगी। इसको लेकर डीआरएम ने आदेश जारी किए हैं। बताया कि दूसरे चरण में अन्य जगहों पर भी स्पीड नियंत्रण की कार्यवाही होगी।