27 अगस्त को चेक हुआ था क्लीयर
इंडसइंड बैंक में 27 अगस्त को एनएच 74 परियोजना का मुआवजे का एक चेक क्लीयर हुआ था। बताया जा रहा है कि चेक क्लीयर करने से पहले बैंक कर्मचारी की ओर से एसएलओ कार्यालय से कंफर्मेशन ली गई थी लेकिन यह कर्मचारी गिरफ्तार बैंककर्मियों से अलग था। पूरे मामले से बैंक में काम करने वाले भी हैरत में हैं और बैंक की साख पर भी सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
एसएलओ से मिले बैंक के रीजनल हेड ऑपरेशन
सरकारी खाते से करोड़ों रुपये निकलने के मामले में इंडसइंड बैंक के मुख्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि मुख्यालय स्तर से भी अंदरूनी जांच शुरू करा दी गई है। इसके साथ ही बैंक के रीजनल हेड ऑपरेशन जॉय प्रकाश दत्ता रुद्रपुर पहुंचे। वे अधीनस्थों के साथ दागदार हुई रुद्रपुर शाखा में गए। साथ ही कलक्ट्रेट में एसएलओ कौस्तुभ मिश्रा से मुलाकात की। एसएलओ ने दत्ता को पूरे मामले में बैंक की ओर से पुलिस को पूरा सहयोग करने को कहा। हालांकि, इस संबंध में जॉय से संपर्क नहीं हो सका।
प्रोफाइल से हटाए नंबर और ईमेल आईडी
पुलिस पूरे प्रकरण में जेल गए मैनेजर की भूमिका को सबसे बड़ा मान रही है। मैनेजर ने बैंक खाते में बनी एसएलओ की प्रोफाइल में दर्ज मोबाइल नंबर और ई मेल आईडी हटा दी थी। पुलिस ने रुपये निकलने के बाद भी मेल और मोबाइल में अलर्ट नहीं आने पर खाता जांचा तो एसएलओ की प्रोफाइल में मोबाइल नंबर और ई मेल आईडी नहीं पाई गई थी।
आर्बिट्रेशन में चल रहे हैं 402 मामले
जिले में नेशनल हाइव की परियोजना में मुआवजा संबंधी 402 मामले आर्बिट्रेशन में चल रहे हैं। इसमें 184 मामले रुद्रपुर बाइपास के हैं। इस बाइपास में अधिग्रहित जमीनों पर सौ फीसदी मुआवजा कृषि दर में दिया गया है। इसके अलावा एनएच 74 में अब तक 437 करोड़ का मुआवजा वितरित हो चुका है।
पुलिस ने चिह्नित किए हैं पांच अभियुक्त
तीन फर्जी चेकों से सरकारी खाते से करोड़ों रुपये निकालने के मामले में पुलिस ने पांच लोगों को चिह्नित कर लिया है। पुलिस टीम अभियुक्तों को पकड़ने के लिए जुटी हुई हैं। तीन राज्यों में टीमों को भेजा गया है। बताया जा रहा है कि पांच अभियुक्तों में से एक से दो लोग रुद्रपुर के ही रहने वाले हैं।
बता दें कि इंडसइंड बैंक से एसएलओ और एनएचएआई के संयुक्त खाते से फर्जी चेकों से 13.51 करोड़ रुपये निकालने के बाद पुलिस ने बैंक मैनेजर देवेन्द्र सिंह निवासी काशीपुर और कैशियर प्रियम सिंह निवासी आवास विकास रुद्रपुर को गिरफ्तार किया था।
पुलिस का कहना था कि गिरफ्तार मैनेजर और कैशियर की पूरे खेल में पूरी तरह से लिप्तता थी। इन लोगों ने फर्जी चेक बैंक में लगाने आए लोगों से व्हाट्सएप कॉल पर बातें की थी। एक अभियुक्त को मैनेजर ने अपने केबिन में बैठाकर चाय पिलाई थी। दो अभियुक्तों को जेल भेजने के बाद पुलिस पांच अन्य लोगों को चिह्नित कर चुकी है। बताया जा रहा है कि इनमें कुछ रुद्रपुर और कुछ दूसरे प्रदेशों के रहने वाले हैं। पुलिस संभावना जता रही है कि अभियुक्ताें की गिरफ्तारी के बाद और भी मामले सामने आ सकते हैं। हालांकि दो सितंबर को मामला सामने आने के बाद एनएचएआई मुख्यालय से सभी पीडी को अपने खाते जांचने के संदेश भेज दिए गए थे। रुद्रपुर में केवल शामली के सरकारी खाते से ही साढ़े चार करोड़ रुपये फर्जी चेक से ट्रांसफर किए गए थे।
एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि पांच अभियुक्तों को चिह्नित किया गया है। इनकी तलाश की जा रही है। रुद्रपुर में इंडसइंड बैंक की शाखा धोखाधड़ी का हेडक्वार्टर थी। बताया कि साढ़े सात करोड़ फ्रीज करने के बाद बचे रुपयों को सुरक्षित करने की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस मुख्य षड्यंत्रकारी तक नहीं पहुंच पाई है
पुलिस फरार चल रहे तीन अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। इसके लिए दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ समेत अन्य राज्यों में पुलिस दबिश दे रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार फरार चल रहे तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मुख्य षड्यंत्रकारी के साथ ही इसमें शामिल कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
28 और 31 अगस्त को आवास विकास स्थित इंडसइंड बैंक शाखा से काला (कंपीटेंट अथॉरिटी फॉर लैंड एक्वीजेशन) एवं एनएचएआइ के संयुक्त खाते से फर्जी तीन चेक के माध्यम से 13.51 करोड़ रुपये नानकसर इंफ्रा फर्म में आईसीआईसीआई बैंक चंडीगढ़, सवारिया ट्रेडर्स, एक्सिस बैंक मुंबई महाराष्ट्र और केपीबी मरीन सर्विस, सेंटल बैंक आफ इंडिया जयपुर राजस्थान में ट्रांसफर कर दिए गए थे। इस मामले में विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कौस्तुभ मिश्रा की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।