अमर उजाला के अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्ल अभियान के तहत रुद्रपुर के रेनबो पब्लिक स्कूल में नारी सशक्तीकरण पर छात्राओं को जागरूक किया गया। इस दौरान विद्यालय की 120 छात्राओं ने महिला सशक्तीकरण और नारी सम्मान के शपथ पत्र भरे।
कार्यक्रम में छात्राओं को संबोधित करते हुए एएसपी स्वतंत्र कुमार ने कहा कि हमारे समाज में आज भी अधिकतर महिलाओं की स्थिति बेहतर नहीं है। महिलाओं को बचपन में पिता, जवानी और बुढ़ापे में पति का सहारा लेने के लिए विवश कर दिया गया है। छात्राओं को इन सभी परिस्थितियों से उबरते हुए अपनी स्वतंत्र और अलग पहचान बनाने की जरूरत है। अपने हक एवं नारी सशक्तीकरण के लिए महिलाओं को स्वयं आगे आना होगा। पुरुषों के साथ ही स्वयं महिलाओं को भी महिलाओं का सम्मान करना सीखना होगा। एएसपी ने कहा ‘नारी का सम्मान है जहां, देश संस्कृति का उत्थान है वहां।’ छात्राओं को रुद्रपुर कोतवाली की महिला दरोगा सुनीता कुंवर ने भी महिला सशक्तीकरण के लिए प्रेरित किया। वहां रेनबो स्कूल प्रबंधक संजीव कुमार मलिक, डायरेक्टर गीतांजलि महिल, प्रधानाचार्य मेलरॉय कैनेथ मैकडोनाल्ड, अनुपम मिश्रा, पूजा सचदेवा, प्रियंका सिंह, जिंदर कौर, सीमा त्यागी, जीएस रावत आदि थे।
कोट
अमर उजाला का अपराजिता कार्यक्रम नारी सशक्तीकरण के लिए अच्छी पहल है। इस कार्यक्रम से महिला सम्मान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। समाज में महिलाओं को पुरुषों से कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।
मानसी, छात्रा
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आज भी हमारे समाज में महिलाओं को घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। नारी सम्मान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए समाज में व्याप्त दहेज प्रथा और दहेज उत्पीड़न जैसी कुप्रथाओं को हटाना होगा।
अपूर्वा, छात्रा
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ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी महिला उत्पीड़न की घटनाएं कम नहीं हुई हैं। सरकार को पहले ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास के जरिये महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा एवं मानसिक शोषण को रोकना चाहिए। उसके बाद शहर की तरफ सोचना होगा।
हिमानी नेगी, छात्रा
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नारी सशक्तीकरण पर अमर उजाला का अपराजिता कार्यक्रम सराहनीय है। समाज में पुरुष और महिलाओं में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए। महिलाएं आज हर क्षेत्र में मुकाम हासिल कर रहे हैं।
बानी गहतोड़ी, छात्रा
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अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम से लोगों की महिलाओं के प्रति सोच बदलेगी। इस तरह के कार्यक्रमों से महिलाओं में आत्मसम्मान की भावना बढ़ेगी। इससे देश के विकास को गति मिलेगी।
साक्षी तिवारी, छात्रा
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लड़कियों को चहारदीवारी में कैद नहीं रहना चाहिए। वह खुले आसमान में उड़कर अपनी मंजिल तक पहुंच रही हैं। पुरुष प्रधान समाज की सोच वालों को अपनी सोच बदलनी ही होगी।
शगुन ठाकुर, छात्रा
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महिलाओं और छात्राओं के आत्मविश्वास को कम करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। महिलाएं भी पुरुषों से किसी मामले में कम नहीं हैं। माता-पिता को पुत्र-पुत्री में भेदभाव नहीं करना चाहिए। बेटियां भी सभी मंजिलें प्राप्त कर सकती हैं।
श्वेता मिश्रा, छात्रा