राज्य की इकलौती खाद्य औषधि एवं विश्लेषण प्रयोगशाला में नमूनों की जांच का काम पटरी से उतर गया है। संसाधनों की कमी के चलते दवा के अलावा खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच भी प्रभावित हो गई है। ऐसे मेें लैब प्रबंधन ने जांच कार्य के लिए अतिरिक्त समय मांगा है।
14 दिनों में पूरी होने वाली खाद्य पदार्थों की जांच के लिए अब 70 दिन का समय मांगा गया है। इस संबंध में शासन, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा विभाग को अवगत कराया जा चुका है।
रुद्रपुर किच्छा रोड पर राज्य की एकमात्र राजकीय खाद्य औषधि एवं विश्लेषण प्रयोगशाला में पूरे प्रदेशभर से आने वाले दवा और खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच की जाती है, ताकि उनकी गुणवत्ता का पता लगाया जा सके।
मगर लैब हमेशा से ही संसाधनों और स्थायी स्टाफ की कमी से जूझती रही है। पिछले एक साल से खाद्य विश्लेषक का पद रिक्त होने से 500 खाद्य पदार्थों के नमूने खराब हो गए थे।
इस बीच एक मई को खाद्य विश्लेषक पद पर गाजियाबाद से आए राजीव शर्मा ने कार्यभार संभाला तो लैब के हालात में सुधार की उम्मीद जगी। मगर इस बीच 28 मई को राजकीय विश्लेषण जेआर ध्यानी मूल विभाग आयुर्वेद हरिद्वार लौट गए।
इस पर जून दूसरे पखवाड़े में लैब में ही कार्यरत खाद्य विश्लेषक डा. राजीव शर्मा को खाद्य विश्लेषक के साथ ही राजकीय विश्लेषक का जिम्मा दिया गया। देशभर में मैगी के खिलाफ चले अभियान के तहत राज्य में भी बड़ी संख्या में नमूने लेकर यहां भेजे गए।
इसके अलावा नियमित तौर पर दवा और खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर लैब में भेजे जा रहे हैं, लेकिन यह विडंबना ही कही जाएगी कि राज्य की इकलौती लैब होने के बाद भी यहां विद्युत व्यवस्था के न तो उचित इंतजाम हैं न ही पर्याप्त स्थायी स्टाफ। एक लिपिक को छोड़ सारा स्टाफ अस्थायी है।
ऐसे में 14 दिन की तय अवधि में खाद्य के साथ ही दवा जांच का काम भी नहीं हो पा रहा है। हालांकि दवा जांचने के लिए तीस दिन का समय निर्धारित है, लेकिन एक ही अफसर पर दोनों जिम्मेदारी होने से 70 दिन का समय मांगा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अतिरिक्त समय मांगे जाने की पुष्टि की है। अफसर के अनुसार बिजली कटौती और स्टाफ की कमी को अतिरिक्त समय लगने का कारण बताया गया है। हालांकि लैब प्रभारी अधिकारी/ सीएमओ डा. एचके जोशी के अवकाश में रहने के कारण फोन पर संपर्क नहीं हो पाया।