बाजपुर। गांव गजरौला स्थित गुरुद्वारा नानकसर ठाठ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब, भाई सतीदास, भाई मतीदास और भाई दयाला जी की 350वीं शहीदी शताब्दी को समर्पित सात दिवसीय विशाल ‘गुरु मान्यो ग्रंथ’ समागम रविवार को श्रद्धा और सत्कार की भावना के साथ संपन्न हो गया। पंजाब से आए रागी जत्थों और कथावाचकों ने सिख इतिहास और गुरबाणी का संदेश दिया।
गुरुद्वारा नानकसर ठाठ में रविवार को सात दिनी गुरु मान्यों ग्रंथ समागम के समापन पर फतेहगढ़ साहिब (पंजाब) से पहुंचे गुरुद्वारा ज्योति स्वरूप साहिब के हैड ग्रंथी ज्ञानी अतर सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब जी की वाणी पर प्रकाश डालते हुए गहन और अर्थपूर्ण कथाकीर्तन किया।
उन्होंने संगत को सिख इतिहास और गुरबाणी के संदेश से अवगत कराया। प्रसिद्ध धर्म प्रचारक अमरजीत सिंह गालिब खुर्द (पंजाब) ने महान सिख शहीदों की अनुपम शहादत, त्याग और सिद्धांतों का मार्मिक वर्णन कर संगत को भावविभोर कर दिया।
इसके अलावा कविशर जत्था भाई दिलजीत सिंह खालसा (सितारगंज) व कविशर जत्था भाई लखवीर सिंह मस्त (पंजाब) सहित अन्य प्रमुख रागी और प्रचारक जत्थों ने गुरु महिमा, शहादत और सिख परंपरा की पावन विरासत का बखान किया।
समागम में संचालन भाई त्रिलोक सिंह यूके और भाई अनमोल सिंह ने किया। इस मौके पर संत बाबा करनैल सिंह, जत्थेदार गुरबख्श सिंह, जोबन सिंह, प्रताप सिंह, हरमीत सिंह बलविंदर सिंह, दर्शन गोयल, सुरजीत अग्निहोत्री, राजेंद्र सिंह बेदी आदि मौजूद रहे।
समागम दूर दराज से पहुंचे संगत
सात दिनों तक चले इस दिव्य समागम में दूर दराज से पहुंची भारी संख्या में संगत ने श्रद्धा व्यक्त की और गुरबाणी के अमृत रस का आनंद उठाया। समागम के समापन पर गुरुद्वारा नानकसर के मुख्य सेवादार बाबा प्रताप सिंह की ओर से संगत का स्वागत करते हुए सभी सहयोगियों, सेवकों का आभार व्यक्त किया।