्र माता-पिता का साया सिर से उठने से अनाथ हुई बेटी का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा नहीं रहेगा। अमर उजाला में छपी खबर पढ़ने के बाद शहर के डॉक्टर दंपति डॉ. धीरेंद्र मोहन गहलोत और पत्नी जीतू गहलोत ने बेटियों का सपना पूरा करने का फैसला किया है। उन्होंने मेडिकल टेस्ट में चयन होने पर एक बेटी की एमबीबीएस की फीस और हॉस्टल का खर्च वहन करने का फैसला किया है।
मालूम हो कि पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट ब्लॉक के ग्राम खतेड़ा (नापड़) निवासी किसान महेंद्र सिंह चुफाल और उनकी पत्नी नंदी देवी की बीमारी से मौत हो गई। उनकी बेटियां कविता और सोनी अनाथ हो गई और पढ़ाई का भार दादा चरन सिंह, दादी लछिया देवी के सिर पर है। जो बेहद गरीब हैं। कविता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात से प्रेरित होकर उन्हें पत्र भेजकर डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने की गुहार लगाई थी। सरकारी अस्पताल में फिजीशियन डॉ. धीरेंद्र मोहन गहलोत ने बताया कि शुक्रवार को अमर उजाला में प्रकाशित बेटियों की अपील डॉक्टर बनने में मदद कर दो, प्रधानमंत्री जी पढ़ी।
जिसके बाद उनका मन बेहद द्रवित है। उनका कहना है कि गरीब छात्र-छात्राओं की मदद के लिये साधन संपन्न लोगों को आगे आना चाहिए। यदि कविता का चयन एमबीबीएस के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में हो जाता है तो उसकी सारी फीस, हॉस्टल का खर्च वह और उनकी पत्नी उठाएंगे।
धन के अभाव में उसकी मेडिकल की पढ़ाई बाधित नहीं होगी। जसपुर के रहने वाले डॉ. धीरेंद्र मोहन गहलोत की पत्नी जीतू गहलोत भी सरकारी अस्पताल में महिला चिकित्साधिकारी रह चुकी हैं। लेकिन उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर अपना नर्सिंग होम खोल लिया है। गहलोत दंपति कई सामाजिक संगठनों से जुड़े हैं।