काशीपुर। बहुजन समाज पार्टी काशीपुर में मुकाबला त्रिकोणीय मानते हुए मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर एक दशक पूर्व की कहानी दोहराने की जुगत में लगी है। पार्टी के सामने इस बार भाजपा और कांग्रेस के मजबूत चेहरे चुनौती बनकर खड़े हैं।
साल 2007-08 में बसपा से मुस्लिम चेहरा रहे शमशुद्दीन ने नगर पालिका सीट जीती थी। इसके बाद आज तक बसपा की झोली खाली ही रही। राजनीति के जानकार इसके पीछे प्रदेश संगठन से लेकर पार्टी हाईकमान तक में हुए बदलाव को वजह मानते हैं। कार्यकर्ता और शीर्ष नेताओं में आपसी समन्वय नहीं होने के कारण भारी दम रखने वाली पार्टी पिछड़ती चली गई।
इस बार हसीन खान बसपा से किस्मत आजमा रहे हैं। वह भी अल्पसंख्यक और कैडर मतदाताओं के बल पर चुनाव जीतने की जुगत में हैं लेकिन कांग्रेस मुस्लिम मतदाताओं को अपना मानती है। अगर कांग्रेस को मुस्लिम मतदाताओं का वोट पड़ता है तो हाथी औंधे मुंह गिर सकता है। संवाद
रामनगर, कालाढूंगी, काशीपुर, जसपुर, महुआखेड़ा गंज समेत सभी जगह प्रत्याशी उतारे गए हैं। काशीपुर में त्रिकोणीय मुकाबला है, जो बसपा के लिए अच्छा रहता है। इस चुनाव में पूर्व चेयरमैन भी साथ है। बसपा की सरकार में कानून व्यवस्था सख्त थी। पहले सभी सुरक्षित थे। उतार चढ़ाव चलता रहता है। लोगों के लिए शिक्षा, स्वस्थ्य, आय के साधन, कानून व्यवस्था ठीक करनी चाहिए। भाजपा ने झूठ फैला रखा है।
-चौधरी शीशपाल सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, बसपा उत्तराखंड