रुद्रपुर। दीपावली से पहले खाद्य पदार्थों की शुद्धता जांचने के लिए चलाए गए अभियान में लोगों की सेहत से खिलवाड़ का खुलासा हुआ है। मोबाइल फूड लैब की मौके पर की गई जांच में मिठाइयों के सैंपल कसाैटी पर पास हो गए लेकिन मसालों के 14 सैंपल मानक में फेल पाए गए।
बृहस्पतिवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने रुद्रपुर के प्रमुख मिठाई प्रतिष्ठानों और सब्जी मंडी में जांच अभियान चलाया। मंगलम, बीकानेर, नवरंग और रूपम समेत अन्य प्रतिष्ठानों से मिठाइयों के 45 नमूने लिए गए। मोबाइल लैब में की गई जांच में सभी नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। इसके बाद टीम ने सब्जी मंडी में हल्दी, मिर्च और धनिया पाउडर के 39 नमूनों की जांच की। इनमें 14 नमूने अधोमानक पाए गए। यानी जांचे गए मसालों के करीब 36 प्रतिशत नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। विभाग के अनुसार, इन नमूनों में रंग और मिलावट की मात्रा तय मानकों से अधिक थी।
टीम ने मेट्रोपॉलिस और आवास विकास के आसपास भी जांच की। अधोमानक पाए गए नमूनों को सील कर आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अभियान में खाद्य विभाग के संयुक्त निदेशक ललित मोहन पांडेय, फूड इंस्पेक्टर आशा आर्या समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे।
बिना लेबल की बोरियों से बिक रहे मसाले
सब्जी मंडी और मीट मार्केट के आसपास खुले मसालों की बिक्री खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। यहां कई दुकानों पर मसाले बोरियों में रखकर बेचे जा रहे हैं। इन पर ब्रांड, पैकिंग की तारीख, बैच नंबर या अन्य जरूरी विवरण उपलब्ध नहीं होने से उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद की उत्पत्ति और गुणवत्ता का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। कुछ स्थानों पर मसाले सब्जियों और मांस के नजदीक रखे होने से धूल, नमी और अस्वच्छ परिस्थितियों के संपर्क में आने की आशंका भी है।
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जवाबदेही तय करना चुनौती
खुले मसालों की बिक्री अपने आप में मिलावट का प्रमाण नहीं है, लेकिन बिना उचित पहचान और गुणवत्ता संबंधी जानकारी के उनकी जांच तथा आपूर्ति शृंखला में जवाबदेही तय करना कठिन हो जाता है। ऐसे में विभाग के सामने केवल नमूने लेने ही नहीं, बल्कि यह पता लगाने की चुनौती भी है कि अधोमानक मसाले कहां से खरीदे गए, उनकी आपूर्ति किसने की और संबंधित विक्रेताओं के पास खरीद के बिल या अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध हैं या नहीं।
घर पर कैसे करें जांच?
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की उपभोक्ता जागरूकता सामग्री और मसालों की जांच संबंधी तकनीकी पुस्तिकाओं में हल्दी, मिर्च, धनिया समेत कई मसालों में मिलावट की आशंका बताई गई है। हालांकि, घरेलू परीक्षण केवल शुरुआती संकेत देते हैं। किसी मसाले में मिलावट या खतरनाक रसायन की मौजूदगी की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही की जा सकती है।
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हल्दी पाउडर
संभावित मिलावट: मेटानिल येलो जैसे अनधिकृत कृत्रिम रंग, लेड क्रोमेट, चाक पाउडर, पीला सोपस्टोन और रंगा हुआ बुरादा।
शुरुआती जांच: एक पारदर्शी गिलास पानी में एक चम्मच हल्दी डालें। प्राकृतिक हल्दी से पानी में धीरे-धीरे हल्का पीला रंग फैल सकता है, जबकि तेज रंग का तुरंत निकलना अतिरिक्त रंग की आशंका पैदा कर सकता है। लेकिन यह निर्णायक परीक्षण नहीं है सामान्य हल्दी भी पानी को रंगती है।
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लाल मिर्च पाउडर
संभावित मिलावट: ईंट का चूरा, रेत, नमक, टैल्क या अन्य खनिज पदार्थ, बुरादा और अनधिकृत कृत्रिम रंग, जिनमें सूडान डाई जैसे रंग भी शामिल हो सकते हैं।
शुरुआती जांच: एक गिलास पानी में थोड़ा मिर्च पाउडर डालें। नीचे बैठने वाले अवशेष को बिना चखे सावधानी से देखें। अवशेष में किरकिरापन ईंट के चूरे या रेत की आशंका का संकेत हो सकता है। पानी पर तैरते बुरादे जैसे कण भी संदिग्ध हो सकते हैं।
सीमा: रंग, पानी में बैठने की गति या अवशेष से सूडान डाई जैसे रसायनों की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए रासायनिक परीक्षण जरूरी है।
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धनिया पाउडर
संभावित मिलावट: बुरादा, चोकर, स्टार्च, नमक और अन्य बाहरी पदार्थ। एफएसएसएआई की मार्गदर्शिका में धनिया पाउडर में गोबर के चूर्ण जैसी मिलावट की आशंका भी सूचीबद्ध है।
शुरुआती जांच: थोड़ा पाउडर पानी की सतह पर छिड़कें। बुरादे या चोकर जैसे हल्के कणों का तैरना संदेह पैदा कर सकता है। हालांकि, धनिया पाउडर के प्राकृतिक कण भी अलग-अलग तरह से व्यवहार कर सकते हैं इसलिए सिर्फ इस आधार पर मिलावट का फैसला न करें। इस घरेलू तरीके से नमक, स्टार्च या जैविक संदूषण की विश्वसनीय पुष्टि नहीं हो सकती।
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काली मिर्च
संभावित मिलावट: पपीते के बीज, हल्के या खोखले जामुन जैसे पदार्थ और बुरादा।
शुरुआती जांच: साबुत काली मिर्च को ध्यान से देखें। आकार, बनावट और रंग में असामान्य अंतर वाले दानों की जांच करें। केवल पानी में तैरने या डूबने के आधार पर शुद्धता तय न करें, क्योंकि दानों का व्यवहार उनके आकार और घनत्व पर निर्भर करता है।
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हींग
संभावित मिलावट: स्टार्च, सोपस्टोन, अन्य मिट्टी जैसे पदार्थ और बाहरी रेजिन।
शुरुआती जांच: असामान्य गंध, रंग, बनावट या गांठों पर ध्यान दें। हालांकि, केवल गंध से असली-नकली का अंतर विश्वसनीय ढंग से तय नहीं किया जा सकता।
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मिलावटी मसालों से स्वास्थ्य को खतरा
खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि मसाले में कौन-सा पदार्थ मिला है, उसकी मात्रा कितनी है और उसका सेवन कितने समय तक किया गया है।
- अनधिकृत कृत्रिम रंग: कुछ रंगों से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हो सकता है। मेटानिल येलो और सूडान डाई जैसे पदार्थों को लेकर खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं। इनकी मौजूदगी की पुष्टि बिना जांच के नहीं की जा सकती।
- लेड क्रोमेट: इसमें सीसा होता है। लंबे समय तक संपर्क से तंत्रिका तंत्र, गुर्दों और अन्य अंगों को नुकसान हो सकता है। बच्चों के लिए सीसे का संपर्क विशेष रूप से चिंताजनक है।
- ईंट का चूरा, रेत और मिट्टी: ये बाहरी अशुद्धियां हैं। इनके साथ दूसरे दूषित पदार्थ भी हो सकते हैं और खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- अस्वच्छ भंडारण: नमी और दूषण से कुछ परिस्थितियों में फफूंद और उसके विषैले पदार्थों का खतरा बढ़ सकता है।
यह भी स्पष्ट रहना चाहिए कि अधोमानक नमूना और असुरक्षित खाद्य पदार्थ हमेशा एक ही श्रेणी नहीं होते। किसी नमूने का मानक से कम गुणवत्ता वाला होना और उसमें स्वास्थ्य के लिए खतरनाक रसायन मिलना अलग निष्कर्ष हैं। रुद्रपुर के 14 नमूनों में कौन-से विशिष्ट पदार्थ मिले, यह उपलब्ध विवरण से स्पष्ट नहीं है। इसलिए उनके बारे में किसी खास रसायन या स्वास्थ्य प्रभाव का दावा नहीं किया जा सकता।
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उपभोक्ता किन बातों का रखें ध्यान?
-पिसे हुए मसाले भरोसेमंद विक्रेता से उचित पैकिंग में खरीदें। पैकेट पर एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर, निर्माता का विवरण, बैच नंबर और लागू तारीख संबंधी घोषणाएं देखें।
-असामान्य रूप से चमकीले रंग, तेज कृत्रिम गंध, नमी या गांठ वाले मसालों से सावधान रहें।
-संभव हो तो साबुत हल्दी, सूखी मिर्च और धनिया खरीदकर साफ करने के बाद घर पर पीसें। इससे कुछ प्रकार की मिलावट पहचानना आसान हो सकता है, हालांकि यह पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
-खरीद का बिल रखें और संदिग्ध उत्पाद की पैकिंग व बैच नंबर सुरक्षित रखें।
-मिलावट की शिकायत खाद्य सुरक्षा विभाग से करें।
कोट:
मिलावटी मसाले स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। लोगों को खुले और बिना पैकिंग वाले मसाले नहीं खरीदने चाहिए। ब्रांडेड और एगमार्क वाले मसाले ही लें। अगर किसी को मिलावट की शिकायत है तो खाद्य सुरक्षा विभाग या सीएमओ कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। त्योहारों पर खानपान में विशेष सावधानी बरतें। -डॉ. एसके गोस्वामी, सीएमओ