काशीपुर। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून ने कुंडेश्वरी स्थित आईआईएम में राज्य स्तरीय पर्यावरणीय क्षमता निर्माण कार्यशाला की। इसका विषय सतत विकास के लिए पर्यावरणीय विनियमों का मार्गदर्शन : ईआईए परिवेश 2.0 सहमति तंत्र एवं अनुपालन आत्मनिर्भर उत्तराखंड रहा।
इसका उद्देश्य नियामकों, उद्योगों, शिक्षाविदों, परामर्शदाताओं एवं नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाकर पर्यावरणीय प्रशासन और सतत औद्योगिक विकास के समन्वय को सुदृढ़ करना था। उद्घाटन सत्र में प्रो. कुनाल के. गांगुली, डीन (विकास) ने उद्योग, शिक्षा व नियामक संवाद को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता पर बल दिया। नैनी पेपर्स लिमिटेड के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक पवन अग्रवाल ने पिछले दशक में उद्योगों की सोच में आए सकारात्मक परिवर्तन पर प्रकाश डाला।
वहीं तकनीकी सत्र में ईआईए एवं पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया पर डॉ. मनोरंजन होता व डॉ. चक्रेश पाठक ने 2006 की ईआईए अधिसूचना की पृष्ठभूमि एवं नीति उद्देश्य स्पष्ट करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य परियोजना नियोजन स्तर पर ही पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को समाहित करना है। मंत्रालय के संयुक्त निदेशक डॉ. मोहित सक्सेना, पीसीबी के पूर्व सीईओ चंदन सिंह रावत, डॉ. आशुतोष गौतम, डॉ. एसएस नेगी व सेंच्युरी पल्प एंड पेपर लालकुआं के नरेश चंद्र ने भी अन्य विषयोँ पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में यह उद्योग रहे शामिल
आईजीएल, नैनी पेपर्स लिमिटेड, सेंच्युरी पल्प एंड पेपर, पॉलीप्लेक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, ग्रास रूट्स रिसर्च एंड क्रिएशन इंडिया प्रा. लिमिटेड, एप्लिंका सॉल्यूशंस एंड टेक्नोलॉजी प्रा. लिमिटेड, हिमालयन वाइन कंपनी प्रा. लिमिटेड आर्चिडपैनल (सितारगंज), मां शीतला वेंचर्स (किच्छा), कोन पॉलिमर (काशीपुर), जीएन पाल मॉलिक्यूल्स, एएसईए (ऋषिकेश), हिमाद्री (ऋषिकेश) आदि संस्थान के प्रतिनिधि मौजूद रहे।