इंडसइंड बैंक से तीन फर्जी चेकाें से करोड़ों रुपये निकालने के मामले में भागे दो अभियुक्त को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। एसएसपी ने एक अभियुक्त पर 25 हजार रुपये का इनाम रखा है। इस प्रकरण में चेकों से निकाली गई पूरी धनराशि सरकारी खाते में वापस हो चुकी है।
दरअसल, बीते 28 और 31 अगस्त को इंडसइंड बैंक में संचालित कंपीटेंट अथारिटी फार एक्वीजिशन (सीएएलए) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के संयुक्त खाते से तीन फर्जी चेकों से 12.62 करोड़ रुपये निकाल लिए गए थे। इसी शाखा से शामली के भी सरकारी खाते से फर्जी चेकों से चार करोड़ रुपये निकाले गए थे।
दो सितंबर को मामले की जानकारी के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया था। पुलिस ने बैंक के शाखा प्रबंधक देवेंद्र सिंह और महिला कैशियर प्रियम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 12 खातों में गए साढ़े सात करोड़ रुपये खातों में होल्ड करा दिए थे। इसके बाद बैंक ने सरकारी खाते से निकाली गई पूरी रकम वापस कर दी थी।
बीते तीन अक्तूबर को पुलिस ने मामले के मास्टरमाइंड ललित कुमार महेंद्रू उर्फ लाली निवासी बलवंत इन्कलेव थाना बिलासपुर को पंजाब के जीरकपुर से गिरफ्तार किया था। लाली को वर्ष 2020 में सरकारी चेकों से रकम निकालने के मामले में सीबीआई भी गिरफ्तार कर चुकी थी। उसने ही बैंक में फर्जी चेकों को लगाया था और इसके लिए शाखा प्रबंधक से साठगांठ की थी। इस मामले में दो अभियुक्त राजकुमार उर्फ चेयरमैन निवासी हरियाणा और मीनू बाठला फरार हैं। दोनों के खिलाफ अदालत से पुलिस ने एनबीडब्ल्यू लिया था। एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि भागे अभियुक्तों की तलाश की जा रही है। एक अभियुक्त राजकुमार पर 25 हजार रुपये का इनाम रखा गया है।