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रफ्ता-रफ्ता सुधरने लगी उद्योग नगरी की हालत

Tue, 20 Dec 2016 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
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नोटबंदी के 41वें दिन उद्योग नगरी में कैश की किल्लत घटने लगी है। शहर के कुछ बैंकों ने कमीशन के खेल में हेराफेरी की थी, अमर उजाला ने उसे प्रमुखता से उजाकर किया था। इसका असर रहा कि बैंकों ने लोगों को निराश नहीं लौटने दिया, वहीं स्थानीय प्रशासन और लीड बैंक ने भी इसमें लोगों की समस्या को गंभीरता से ले लिया।

यही कारण रहा है कि शनिवार शाम को हल्द्वानी और रुद्रपुर को 170 करोड़ रुपए नई करेंसी के रूप में मिल गए। इसका परिणाम भी सोमवार को बैंकों में लोगों की लंबी कतार नहीं दिखाई दी। बैंकों ने अपने ग्राहकों उनकी जरूरत के मुताबिक धनराशि का भी भुगतान किया है। अब उद्योग नगरी की हालत रफ्ता-रफ्ता सुधरने लगी है। सोमवार से बैंकों में सरकारी राजस्व भी जमा होने लगा है। हालांकि लीड बैंक के अनुसार अभी भी जिले को 900 करोड़ रुपए की जरूरत है, फिर भी स्थिति सामान्य होने लगी है।
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नोटबंदी के फरमान के बाद लोगों को कैश के लिए दिक्कत हो रही थी। पिछले 20 दिन से उद्योग नगरी रुद्रपुर-पंतनगर सिडकुल में जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया था। 14 दिसंबर को रुद्रपुर और हल्द्वानी से पुराने नोट की 300 करोड़ रुपए की खेप जमा करने के लिए लीड बैंक के अफसरों की टीम आरबीआई दफ्तर कानपुर गई थी। इसके साथ स्कॉट फोर्स की निगरानी में रुद्रपुर से इंस्पेक्टर जेसी पाठक भी गए थे। वहां पहुंचने के बाद आरबीआई ने दो दिन के अंतराल में रुद्रपुर और हल्द्वानी के लिए 170 करोड़ रुपए की नई करेंसी स्वीकृत की जो कि 17 दिसंबर को हल्द्वानी के मंडी स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में पहुंचा और वहीं से रुद्रपुर के लिए धनराशि मंजूर हुई।

यह धनराशि पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा सहित अन्य शाखाओं को बांटी गई। कानपुर से 170 करोड़ की राशि में 2000 और 100 के नोट मिले हैं। बैंकों ने भी सोमवार से राशि का वितरण शुरू किया। इससे लोगों को राहत भी पहुंची। लीड बैंक अधिकारी मधुसूदन सुमन का कहना है कि जिले के लिए 900 करोड़ रुपए रोजाना की जरूरत है, अब धीरे-धीरे अब बैंकों को कैश मिलने लगा है। पंजाब नेेशनल बैंक के ब्रांच हेड रमेश थांगी का कहना है कि उनकी शाखा को भी 35 लाख रुपए मिलने से अब भीड़ घटने लगी है। बैंक शाखा से दस हजार तक की नई करेंसी दी जा रही है। एटीएम में डाले गए आठ लाख रुपए चार घंटे के भीतर ही खत्म हो गए। लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार के फैसले में अब उन्हें परेशानी होने लगी है। परेशान ग्राहक उमेश जोशी ने बताया कि उन्हें अपने ही रुपए निकालने के लिए ढाई घंटे लाइन में लगना पड़ रहा है, जिस पर उन्हें सिर्फ दो हजार रुपए ही मिल पाए।



रुद्रपुर, हल्द्वानी से 500, 1000 रुपए के पुराने नोटों की राशि करीब 300 करोड़ रुपए लेकर हम बतौर स्कॉट के साथ 14 दिसंबर को कानपुर के लिए रवाना हुए। वहां आरबीआई के मुख्यालय में धनराशि लेने के लिए यूपी और उत्तराखंड के बैंक अधिकारियों को कैश लेने के लिए मारामारी थी। दो दिन बाद 170 करोड़ रुपए का कैश हल्द्वानी और रुद्रपुर के लिए मंजूर हुआ, यह धनराशि हमें कानपुर के गुमती नंबर पांच की चेस्ट बैंक ऑफ बड़ौदा से मिली, जिसे लेकर हम 17 दिसंबर शनिवार को हल्द्वानी पहुंचे।
- जेसी पाठक, इंस्पेक्टर ऊधमसिंह नगर पुलिस।



रुद्रपुर तहसील में भी नोटबंदी के बाद से ठप पड़ा रजिस्ट्री का काम भी शुरू होने लगा है। पिछले तीन चार-दिन के अंतराल में प्रतिदिन कम से कम 8-10 रजिस्ट्री होने से भी राजस्व (कैश) बैंकों में जमा होने लगा है। तहसील के सब रजिस्ट्रार एसपी पांडे का कहना है कि जमीनों की रजिस्ट्रियां होने लगी हैं। लोग जो भी शुल्क जमा करवा रहे हैं, वह रोजाना बैंकों में जमा कर दिया जा रहा है। सोमवार को भी 10 से अधिक जमीनों की रजिस्ट्री हुई हैं, जिसका राजस्व एसबीआई की शाखा में जमा कर दिया गया है।
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व्यापार मंडल के महामंत्री और दालों के थोक विक्रेता हरीश अरोरा का कहना है कि नोटबंदी के कारण लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए अब व्यापारी भी अपने पास छोटे नोट नहीं रख रहे हैं। व्यापारी वर्ग भी बैंकों में राशि जमा कर रहा है, इससे भी बैंकों को कैश की दिक्कत से राहत मिल रही है। वहीं रुद्रपुर के दालों के होलसेल विक्रेता विजय फुटेला का भी कहना है कि वह भी बैंकों में कैश जमा करवा रहे हैं, प्रतिदिन होने वाला लेनदेन के बाद जो भी बिक्री का कैश आ रहा है वह बैंकों में बराबर जमा हो रहा है।
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