मणिपुर, उत्तराखंड समेत देशभर से पहुंचे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पावर लिफ्टर
काशीपुर। उत्तराखंड स्टेट पावर लिफ्टिंग एसोसिएशन की ओर से छह दिनी 49वीं पुरुष और 41वीं महिला सीनियर राष्ट्रीय इक्विप्ड पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। मंगलवार को उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज प्रेक्षागृह में मुख्य अतिथि दीपक बाली और पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा ने प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। प्रतियोगिता में उत्तराखंड के अलावा मणिपुर, बंगाल, असम, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, बिहार, अंडमान निकोबार आदि के करीब 400 खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम स्थल पर खिलाड़ियों का ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। मौके पर फैय्याज अहमद, अर्पित मेहरोत्रा, सुरेंद्र कौर, बेबी कौर, जसविंदर कौर जस्सी, संतोष कौर, हरीश कुमार एडवोकेट, आसिफ रजा आदि थे।
चुनौतियों पर इच्छा शक्ति भारी
पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने काशीपुर पहुंचीं खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना चुकी हैं पहचान
अरुण कुमार
काशीपुर। महिला-पुरुष सीनियर राष्ट्रीय पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने काशीपुर पहुंचीं अधिकतर महिला खिलाड़ी अपनी इच्छा शक्ति के बल पर कई विषम परिस्थितियों और चुनौतियों को पार कर खेल में नाम कमा रही हैं। किसी का मां मिट्टी के बर्तन बेचकर परिवार का भरण पोषण कर रही है तो किसी ने समाज की पुरुषवादी सोच के खिलाफ जाकर खेलों के प्रतिभाग किया। इनके तमगों की चमक इनकी सफलता की कहानी बयां करती है। हालांकि ये महिला खिलाड़ी कहीं न कहीं सरकार से निराश नजर आईं। उनका कहना है कि देश के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने के बाद भी वह सरकारी सेवाओं से महरूम हैं। यदि सरकार खिलाड़ियों को उनकी योग्यता के अनुसार प्रोत्साहित करे तो पावर लिफ्टिंग की ओर महिलाओं का रुझान बढ़ेगा। संवाद
कोट......
हमें देख कई ने पावर लिफ्टिंग चुनी सरकार हमें कब चुनेगी
- 2017 से पावर लिफ्टिंग का प्रशिक्षण ले रही हूं। एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण समेत पांच राष्ट्रीय और एशियन पदक जीत चुकी हूं। पति धीरज तलवार उनके कोच है। उस समय पावर लिफ्टिंग को चुना, जब उनके क्षेत्र में महिलाएं इस खेल में हिस्सा नहीं लेती थी। अब उन्हें देखकर कई लड़कियां पावर लिफ्टिंग को चुन चुकी हैं। उनका बेटा ईशान भी एशियन रजत पदक विजेता है। वह और उनका बेटा एशियन पदक जीतने के बाद भी सरकारी सेवा से महरूम हैं। उत्तराखंड सरकार को खिलाड़ियों को नौकरी देनी चाहिए। - मोनिया, हरिद्वार
डाइट के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा
छह साल से कोच कमलापति त्रिपाठी से पावर लिफ्टिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। एक मध्यम परिवार से ताल्लुक रखती हूं। सारे परिवार का बोझ पिता श्रीराम नरेश सिंह पर है। यहां तक पहुंचने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा है। डाइट के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। कई राष्ट्रीय पदक जीतने के बाद भी सरकारी सेवा से वंचित हैं। इसी खेल में भविष्य तराशना है। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। सरकार से उम्मीद है कि वह उन्हें सरकारी विभाग में नौकरी मुहैया कराएगी। - ज्योति सिंह, मिर्जापुर
- 22 साल से पावर लिफ्टिंग में है। विश्व चैंपियन, एशिया चैंपियन, एशिया स्ट्रांग वूमन, सीनियर चैंपियन बन चुकी है। 18 साल से रेलवे में अपनी सेवा दे रही है। वह बीकानेर राजस्थान में उच्च पद पर कार्यरत है। उनके पति चुनेंदर सिंह 777.5 किग्रा भार उठाकर भारतीय रिकॉर्ड बनाए हुए हैं। 11 साल से वह इस रिकॉर्ड पर बने हुए हैं। पावर लिफ्टिंग दिल्ली में विवाद के कारण कई खिलाड़ी नौकरी से वंचित है। जिसके चलते काफी खिलाड़ियों ने इस खेल से दूरी बनानी शुरू कर दी है। - रेखा आचार्य, बीकानेर राजस्थान
मिट्टी के बर्तन बेच मां कर रही गुजारा
चार साल से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हूं। नेशनल चैंपियन, स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियन, स्ट्रेंग वूमन, वर्ल्ड चैंपियन बन चुकी हूं। कई पदक जीतने के बाद भी सरकारी सेवा का लाभ नहीं मिल सका है। पिता गिरधारी लाल की मृत्यु हो चकी है। माता प्रेमवती मिट्टी के बर्तन बेचने से परिवार का गुजारा हो रहा है। यहां तक पहुंचने के लिए लाखों रुपये कर्ज हो चुका है। सरकार ऐसे खिलाड़ियों को डाइट के लिए व्यवस्था व नौकरी देकर प्रोत्साहित करे। जिससे उभरते खिलाड़ियों का भी पावर लिफ्टिंग की ओर रुझान बढ़ सके। - कृष्णा प्रजापति, भीमनगर, गुरुग्राम