सिडकुल पंतनगर में छाई वैश्विक मंदी छटने का नाम नहीं ले रही है। उद्योग चरमराए हुए हैं। वहीं बार-बार हो रही विद्युत कटौती और ऊपर से बढ़े विद्युत रेट भी उद्योगों को घाटे में डाल रहे हैं।
ऐसे में उद्योगों ने विद्युत लोड कम कराना शुरू करा दिया है। छह माह से भी कम समय में करीब तीस फैक्ट्रियां लोड कम करा चुकी है।
सिडकुल पंतनगर में आटो सेक्टर सहित टैक्सटाइल, खाद्य, दवा, प्लाईवुड, प्लास्टिक की करीब 500 फैक्ट्रियां संचालित हैं। मगर खाद्य सेक्टर को छोड़ बाकी की स्थिति ठीक नहीं है, खासकर आटो सेक्टर लंबे समय से उबर नहीं पा रहा है।
मांग न मिलने के कारण उत्पादन में इजाफा नहीं हो रहा है। उद्योगों मेें रोजाना चार से छह घंटे होने वाली विद्युत कटौती से उद्योगों की स्थिति और भी चिंताजनक हो रही है।
यही वजह है कि करीब छह माह की अवधि में ही करीब तीस उद्योग विद्युत भार कम करा चुके हैं। इसकी वजह मांग न होने की वजह से उत्पादन कम किया जाना बताया जा रहा है।
वहीं सुचारु विद्युत आपूर्ति न मिलने और ऊपर से बढ़े हुई विद्युत दरें भी उद्योगों को झुलसा रही हैं। प्रति केवी फिक्स चार्ज जो पिछले वर्ष तक 230 रुपये था वह इस वित्तीय वर्ष 290 रुपये हो गया है।
ऊर्जा निगम सूत्रों के अनुसार लोड कम कराने के बाद उद्योग 750 से 250, 900 से 600, 22 सौ से 12 सौ, 200 से 120, सौ से 60 या 40, पांच सौ से 280, 250 केवीए से 120 केवीए के भार पर पहुंच गए हैं।
हाइटेंशन के अलावा लो-टेंशन कनेक्शनों के भी भार कम कराए गए हैं। लोड बढ़ाने वाले कम ही मामले देखने को मिल रहे हैं। सिडकुल पंतनगर आरएम जीपी दुर्गापाल का कहना है कि फिलहाल मंदी का असर बरकरार है।
वहीं ऊर्जा निगम डीजीएम नरेंद्र सिंह टोलिया ने बताया कि तमाम उद्योगों ने विद्युत भार कम कराए हैं। हालांकि बड़े उद्योगों में विद्युत भार कम कराने के अधिक मामले देखने को नहीं मिल रहे हैं।
वहीं उद्यमी/उकांद्र व्यापार प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष पूरन चंद्र भट्ट का कहना है कि फिलहाल उद्योगों की स्थिति ठीक नहीं है। उद्यमी उबरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।