रुद्रपुर। द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मीना देउपा ने भाई-भाभी पर परिवादिनी की जमीन को बेचने और फर्जी मुख्त्यारनामा के आधार पर खाता खोलकर संचालित करने के आरोप की निगरानी याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
हरियाणा के गुरुग्राम निवासी नीना शर्मा ने द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में एक जुलाई 2024 को निगरानी याचिका दाखिल की थी। उन्होंने अपर सिविल जज बाजपुर की अदालत से फौजदारी परिवाद निरस्त होने से व्यथित होकर याचिका दाखिल की थी। इसमें कहा था कि उनका पैतृक स्थान वार्ड नंबर तीन रामभवन, बाजपुर में है। वह शादी के बाद दिल्ली में अपनी ससुराल में रहती हैं। उनकी पैतृक संपत्ति बाजपुर के ग्राम भौना इस्लामनगर में 1.6730 हेक्टेयर है। उनके सगे भाई ने जमीन की देखभाल करने की बात कहकर 22 दिसंबर 2018 को एक मुख्त्यारनामा करा दिया था।
उन्होंने मुख्त्यारनामा को बिना पढ़े समझे, भाई के हक में हस्ताक्षर कर हवाले कर दिया। वर्ष 2019 में उनको पता चला कि भाई राजीव सूद ने उनकी जमीन को बेच दिया और जमीन बेचने की एवज में मिले रुपये देने से इनकार कर दिया। उनको गालीगलौज कर धमकी दी गई। उन्होंने मुख्त्यारनामा प्रवर्तनीय को निरस्त करा दिया था। उनको पता चला कि भाई और भाभी ने उनके फर्जी हस्ताक्षर कर फर्जी मुख्त्यारनामा पेश कर एक खाता खोल दिया और इसका संचालन दोनों की ओर से किया जाता रहा। बैंक से उनके नाम से भूमि पर लाखों रुपये का ऋण भी ले लिया और इसको उन्होंने अदा किया। उन्होंने पुलिस में तहरीर दी, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। अदालत ने सुनवाई के बाद निगरानीकर्ता नीना शर्मा की ओर से प्रस्तुत फौजदारी निगरानी को निरस्त कर दिया।