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खास खबर: भारतीय कुक्कुट नस्लों के संरक्षण-संवर्धन में जुटे वैज्ञानिक, जानिये फाउल व कड़कनाथ की खूबी और विशेषता

Thu, 29 May 2025 12:18 PM IST
हीरा मेहरा सुरेंद्र कुमार वर्मा, संवाद

सार

पंत विवि को अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना (एक्रिप) के तहत कुक्कुट नस्लों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कार्ययोजना मिली है। इसके तहत पर्वतीय किसानों को उत्तराखंड की कुक्कुट प्रजाति फाउल और छत्तीसगढ़ के कड़कनाथ के चूजे मुफ्त में दिए जा रहे हैं। 
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फाउल प्रजाति के मुर्गे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना (एक्रिप) के तहत कुक्कुट नस्लों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कार्ययोजना मिली है। इसके तहत पर्वतीय किसानों को उत्तराखंड की कुक्कुट प्रजाति फाउल और छत्तीसगढ़ के कड़कनाथ के चूजे मुफ्त में दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही बैकयार्ड पोल्ट्री फार्म की तकनीक मुहैया करवाई जा रही है ताकि इन नस्लों का संवर्धन किया सके। इससे पर्वतीय किसानों की आर्थिकी सुधरेगी और पलायन पर रोक लगेगी।

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परियोजना अधिकारी डाॅ. अनिल कुमार ने बताया कि एक्रिप के तहत कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय हैदराबाद की ओर से विवि में कुक्कुट प्रजनन के लिए ''''एक्रिप पोल्ट्री केंद्र'''' की स्थापना की गई है। परियोजना के तहत वैज्ञानिक कुक्कुट की नई नस्ल भी विकसित करने में जुटे हैं। यह केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक प्रशिक्षण और नई तकनीकों का प्रसार भी कर रहा है। डाॅ. कुमार ने बताया कि विवि के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान और शोध निदेशक डॉ. अजीत सिंह नैन के अथक प्रयासों से यह परियोजना पंतनगर विवि को हासिल हुई है।

उत्तरा फाउल की खूबी
विवि के वैज्ञानिकों ने कुक्कुट की उत्तरा फाउल प्रजाति विकसित की है। ये हिमालयी क्षेत्र के अनुकूल होने से पहाड़ों पर पोल्ट्री उद्योग के मुफीद है। इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक और इसका मांस अधिक स्वादिष्ट होता है। इसका अंडा लाल रंग और 50 ग्राम का होता है। एक मुर्गी साल में 165-170 अंडे देती है। यह साढ़े तीन माह में एक किलो वजन प्राप्त कर लेती है। काला रंग होने से इसकी काफी मांग है और महंगी बिकती है। यह अपने निषेचित अंडों से 21 दिन में स्वयं चूजे निकालती हैं।

कड़कनाथ की विशेषता

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फिनोमिन अधिक होने से कड़कनाथ का मांस काला और अंडा हल्के भूरे रंग का होता है। इसमें विभिन्न रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है। अन्य नस्लों के इसमें वसा की मात्रा कम होती है। न्यूनतम कोलेस्ट्राॅल व विभिन्न अमीनो एसिड सहित विटामिन बी-1, बी-6 व बी-12 पाया जाता है। मुर्गे का वजन पांच माह में डेढ़ किलो तक होता है। मुर्गी वर्ष में 150-180 अंडे देती है, जिनका वजन 42-45 ग्राम होता है। वैज्ञानिक शोध में इसका मांस हृदय रोगियों के लिए मुफीद पाया गया है। इसमें तंत्रिका विकार संबंधी औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। 

परियोजना के तहत उत्तरा फाउल और कड़कनाथ के संरक्षण व संवर्धन सहित कुछ अन्य कुक्कुट नस्लों का विकास करना है। साथ ही बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग के लिए संपूर्ण तकनीकी ज्ञान का पैकेज विकसित करना है। जिससे किसानों को उनके घरों पर ही आय का जरिया मिल सके और उनकी गुणवत्ता युक्त पोषण व्यवस्था भी सुनिश्चित हो सके। इस परियोजना में डॉ. शिव कुमार, डा. एसके सिंह और डॉ. राजीव रंजन कुमार सहायक के रूप में जुड़े हैं। - डाॅ. मनमोहन सिंह चौहान, कुलपति पंतनगर विवि।

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