राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधीन संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) ऊधमसिंह नगर जिले में जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए वरदान साबित हो रहा है। जन्मजात शारीरिक विकृतियों से जूझ रहे जिले के 641 बच्चे इस योजना का लाभ लेकर सामान्य जीवन जी रहे हैं।
वर्ष 2015 से शुरू इस कार्यक्रम चिकित्सक, नर्स और फार्मासिस्टों की 15 टीमें बनी हैं। रुद्रपुर ब्लॉक में सर्वाधिक तीन टीमें कार्यरत हैं, जबकि शेष छह ब्लॉकों में 15 सदस्यीय दो-दो टीमें लगाई गई हैं, जो सरकारी स्कूलों से लेकर आंगनबाड़ी तक विद्यार्थियों की सेहत की जांच कर रही हैं। कार्यक्रम के तहत 18 वर्ष की उम्र तक के विद्यार्थियों में जन्मजात कटे होंठ , तुतलाना, मुड़े हुए पैर, हड्डियों की विकृति, मंद बुद्धि , मोतियाबिंद, चमड़ी रोग, कान बहना, बहरापन, तंत्रिका तंत्र संबंधी रोग और बच्चों में देरी से समझने की समस्या का उपचार किया जा रहा है।
जिले में वर्ष 2015-16 से अब तक 641 विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिला है। इनमें जन्म से लेकर छह वर्ष से आंगनबाड़ी केंद्रों पर 448 बच्चों और विद्यालयों में 193 विद्यार्थी शामिल हैं। एनएचएम के जिला समन्वयक नीरज सक्सेना कहते हैं कि जरूरतमंद लोगों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिले में जगह-जगह स्वास्थ विभाग की टीमें कार्य कर रही हैं।
10 लाख रुपये तक निशुल्क उपचार की सुविधा
फरवरी-2013 में शुरू राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का फायदा जागरुकता के अभाव में कई अभिभावक नहीं उठा पाते। सरकार की तरफ जन्म से 18 वर्ष तक के विद्यार्थियों को जन्मजात बीमारियों के उपचार और जटिल ऑपरेशन के लिए 10 लाख रुपये तक निशुल्क उपचार की सुविधा है। इसके लिए फोर्टीज, जॉलीग्रांट और महंत इंद्रेश अस्पतालों से सरकार का अनुबंध है।
पिछले छह माह में 169 बच्चों का उपचार
स्कूल में उपचार 47 बच्चे
आंगनबाड़ी में उपचार 122 बच्चे
हृदय रोगी 76 बच्चे
बहरापन 08 बच्चे
अन्य रोग 85 बच्चे