जरूरतमंदों को कर्ज देकर फिर उनसे अधिक से अधिक पैसा वसूलने वाले सूदखोरों पर पुलिस की सख्ती के बाद रिजर्व बैंक भी सख्त हो गया है। रिजर्व बैंक के सहायक प्रबंधक ने रुद्रपुर से मिली सूदखोरी से संबंधित शिकायती पत्र को देहरादून कार्यालय भेजकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इधर, एसएसपी के निर्देश पर दो महिला सूदखोरों के खिलाफ पुलिस जांच में जुट गई है।
अमर उजाला ने सूदखोरों के खिलाफ लगातार खबरें प्रकाशित करते हुए उत्पीड़न के शिकार लोगों का दर्द साझा किया था। एसएसपी की ओर से जारी व्हाट्स एप नंबर पर लोगों ने शिकायतें दी थी। पुलिस ने जब सूदखोरों पर शिकंजा कसना शुरू किया तो उन्होंने अवैध कारोबार को कुछ दिनों के लिए समेट लिया था। इधर, जगतपुरा निवासी एक व्यक्ति ने चार महिला और एक पुरुष सूदखोर का नाम उजागर करते हुए डीएम के साथ ही आयुक्त, मुख्य महाप्रबंधक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (कानपुर), और वित्त मंत्री को शिकायत भेजी थी।
शिकायत में कहा गया था कि यह लोग आठ से 10 फीसदी मासिक ब्याज पर ऋण देने का काम करते हैं। इसकी एवज में हस्ताक्षरयुक्त कोरा चेक, स्टांप ले लेते हैं। आरोप है कि पूरा भुगतान करने के बाद भी ऋणी को चेक और स्टांप वापस नहीं किए जाते हैं। इनके आधार पर ऋणी का आर्थिक शोषण किया जाता है। मंसूबों में कामयाब नहीं होने पर यह लोग चेक को कोर्ट में लगाकर मुकदमा दर्ज करा देते हैं। इस शिकायत पत्र का संज्ञान लेते हुए रिजर्व बैंक के सहायक महाप्रबंधक महेश चंद्र तिवारी ने आवश्यक कार्रवाई के लिए भारतीय रिजर्व बैंक बाजार आसूचना कक्ष देहरादून को भेज दिया है।
दो लाख का ऋण ब्याज सहित साढ़े चार लाख हो गया
रुद्रपुर। सूदखोरों के खिलाफ पुलिस की सक्रियता के बाद अब पीड़ित लोग उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। एक व्यापारी ने पत्नी के साथ एसपी क्राइम कमलेश उपाध्याय के समक्ष अपनी समस्या रखी। कहा कि जरूरत पड़ने पर उन्होंने एक साल पहले दो लाख रुपये का ऋण लिया था। लेकिन, कारोबार में घाटा होने की वजह से वह कुछ किस्तें चुका नहीं पाया था। इसके बाद ऋण देने वाले ने ब्याज सहित अब उसे साढ़े चार लाख रुपये चुकाने का दबाव बनाया जा रहा है। सूदखोर उसका घर अपने नाम करने की कोशिश कर रहा है। एसपी ने काशीपुर कोतवाल को मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।