काशीपुर में रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधते हुए। संवाद
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रक्षाबंधन सावन की पूर्णिमा पर मनाया जाता है लेकिन इस वर्ष भद्राकाल के कारण दिनभर संशय की स्थिति बनी रही। कुछ लोगों ने बृहस्पतिवार को रक्षाबंधन मनाया। तो कुछ ने शुक्रवार को मनाया। इस दौरान बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा और माथे पर तिलक लगाकर उनके दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंटकर जीवनभर उनकी रक्षा का वचन दिया।
वहीं बहुत से लोगों ने भद्राकाल लगने के कारण रक्षाबंधन शुक्रवार को मनाने का निर्णय लिया। दीप ज्योति ज्योतिष कार्यालय के मुख्य पुजारी पं. मोहन प्रसाद जगूड़ी शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास की पूर्णिमा की अवधि 11 अगस्त की सुबह 10:38 से 12 अगस्त की सुबह 7:05 बजे तक है। इस साल 11 अगस्त के सूर्योदय से ही भद्राकाल लग गया था जो रात 8:51 बजे तक रहा।
शास्त्रों के मुताबिक कोई भी शुभ कार्य भद्राकाल में नहीं होता है। इसलिए 12 अगस्त के सूर्योदय से लेकर 7:05 बजे तक राखी बांधने का शुभ मुहूर्त रहेगा। हिंदू धर्म में उदया तिथि सर्वमान्य है। इसलिए बहनें 12 अगस्त को किसी भी समय राखी बांध सकतीं हैं।
रक्षाबंधन के लिए बृहस्पतिवार को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में बहनों ने मुफ्त यात्रा का लाभ उठाया। इसके लिए बृहस्पतिवार सुबह से ही जसपुर के बस स्टैंड पर यात्रियों की भीड़ रही। बसों में भीड़ होने के कारण कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। विधायक आदेश चौहान, पूर्व विधायक डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल, पालिकाध्यक्ष मुमताज बेगम, नगर पंचायत महुआडाबरा की अध्यक्ष गायत्री सिंह ने क्षेत्रवासियों को रक्षाबंधन की बधाई दी।
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बाजपुर में बसों, रेलगाड़ियों, राखियों, मिठाई की दुकानों पर भीड़ रही। कुछ लोगों ने बृहस्पतिवार सुबह शुभ मुहूर्त में राखी बांधी जबकि कुछ लोग शुक्रवार को राखी मनाएंगे। केलाखेड़ा के बाजार में भी चहल-पहल रही। कुछ महिलाओं ने बताया कि मुफ्त यात्रा संबंधी सरकारी आदेश के बाद भी रोडवेज बसों में उनसे किराया लिया गया।