काशीपुर। अचानक बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। आंधी और बारिश से गेहूं की फसल गिर गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। इससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ से हुई बेमौसम बारिश, तेज हवा और ओलावृष्टि ने कृषि और बागवानी के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवा से गेहूं की खड़ी फसल कई स्थानों पर गिर गई है, जिससे दाना छोटा होने और उपज घटने की आशंका है।
दलहन को होगा नुकसान
मसूर और चने की तैयार फसल में नमी से दाना काला पड़ने और फलियों के चटकने का डर है। हाल ही में बोई गई मूंग और उड़द की फसलों के लिए यह बारिश अत्यंत हानिकारक हो सकती है। मिट्टी की ऊपरी सतह पर सख्त पपड़ी जमने से बीजों के अंकुरण में बाधा आएगी, जिससे दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है।
वहीं, तेज हवा के साथ हुई बारिश से आम और लीची के बौर झड़ गए हैं। अधिक नमी से मधुमक्खियों की सक्रियता कम होने से परागण भी प्रभावित हुआ है, जिसका असर फलों के उत्पादन पर पड़ेगा। बेल वाली सब्जियों (लौकी, कद्दू, खीरा) और टमाटर में सड़न और फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ गया है।
खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करें
कृषि वैज्ञानिक अनिल चंद्रा ने किसानों को सलाह दी कि वे खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करें। कटी हुई फसलों (लाई/सरसों) को ढक कर रखें। धूप निकलने के बाद फसलों पर कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव करें। जो किसान मूँग की बुवाई कर चुके हैं, वह मिट्टी सूखने पर हल्की हैरोइंग कर पपड़ी तोड़ें ताकि अंकुरण सही हो सके। 22 मार्च से मौसम में सुधार की संभावना है, जिसके बाद ही कटाई का कार्य पुनः शुरू करना उचित होगा।