जसपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कुछ जीवित मतदाताओं को मृत दर्शाकर आपत्ति दर्ज किए जाने के मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मतदाताओं ने आपत्तियों की निष्पक्ष जांच और गलत सूचना देने वालों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग उठाई है।
विधानसभा क्षेत्र में लगभग 10 से अधिक ऐसे जीवित मतदाता हैं जिन्हें मृत दर्शाकर आपत्ति लगाई गई है। इन्हीं मतदाताओं और उनके परिजनों का कहना है कि मतदाता सूची में सुधार जरूरी है, लेकिन किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर उसे मृत बताकर आपत्ति दर्ज करना गंभीर विषय है। ऐसी स्थिति में संबंधित मतदाता को अपने जीवित होने का प्रमाण देने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। मतदाताओं ने प्रशासन से मांग की कि प्रत्येक आपत्ति का तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर परीक्षण किया जाए ताकि मतदाता सूची में सुधार के साथ-साथ हर योग्य नागरिक का मताधिकार भी सुरक्षित रहे। स्वीट व्यापारी मोहम्मद यूनुस ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ मृत्यु के आधार पर आपत्ति दर्ज की जाती है तो उसके समर्थन में प्रमाण भी मांगा जाना चाहिए। केवल आपत्ति के आधार पर किसी पात्र मतदाता का नाम हटाने की प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए।
व्यापार मंडल अध्यक्ष हरिओम सिंह ने कहा कि प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है ताकि वास्तविक मतदाता किसी भी तरह अपने मताधिकार से वंचित न हो। रेडीमेड व्यापारी गुलजार सिद्दीकी ने कहा कि आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि जांच में आपत्ति गलत पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए।
निर्वाचन रजिस्ट्री अधिकारी/एसडीएम, राहुल शाह ने बताया कि आपत्तिकर्ता यदि साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहता है या आपत्ति द्वेषभावना से प्रेरित लगती है तो आपत्तिकर्ता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले दोनों को नोटिस जारी कर साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा।