सितारगंज में सिडकुल चौकी का मुआयना करते एसएसपी बरिंदरजीत सिंह।
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सितारगंज में चोरी के शक में पूछताछ के लिए सिडकुल चौकी लाए गए छात्र युवक की मौत पुलिस को सवालों के घेरे में खड़ा कर रही है। ग्रामीण के घर चोरी में युवक को संदिग्ध मानकर पूछताछ के लिए उठाया तो गया लेकिन युवक पर मुकदमा दर्ज नहीं था। पुलिस की यह कहानी कि युवक ने हवालात में फांसी लगाई है, लोगों के गले नहीं उतर रही है। एसएसपी ने घटना में पुलिस कर्मियों की लापरवाही तो मानी लेकिन मौत कैसे हुई? इस सवाल का एसएसपी के पास भी जवाब नहीं मिला।
8/9 जुलाई की रात को सिसौना गांव में एक घर में चोरी की वारदात में मृतक युवक धीरज सिंह राणा उर्फ धीरू को संदिग्ध माना जा रहा था। पूछताछ के लिए धीरज को चौकी बुला लिया गया लेकिन हवालात में मुल्जिमों की तरह बंद रखना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है। 24 घंटे से धीरू को 120 स्क्वायर फुट के हवालात में बंद कर रखा गया था। हवालात में जब धीरू मृत हालत में मिला तो न वहां पंखा लगा था और न ही हवालात में कोई कुंडा ही लटक रहा था। पुलिस हवालात में किसी भी आरोपी को बिठाने से पहले ही उसकी जामा तलाशी लेती है। धीरू के पिता को जब पंचनामा भरने के लिए हवालात में मृतक को दिखाने ले जाया गया तो उन्होंने भी सीधे तौर पर बेटे का फांसी लगाकर आत्महत्या करना नहीं माना। उन्होंने पुलिस पर हत्या करने का आरोप लगाया। हालांकि, एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने इस मामले में पुलिस कर्मियों की लापरवाही मानी है। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।