उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में बुधवार को रुद्रपुर नगर निगम की सीमा विस्तार पर फुलसुंगी ग्रामसभा के लोगों की आपत्तियां और सुझाव लिए गए। करीब साढ़े तीन घंटे चली जनसुनवाई में 62 लोगों ने आपत्तियां और सुझाव रखे। जनसुनवाई में पहुंचे अधिकांश लोग नगर निगम में शामिल नहीं होना चाहते थे। अब बृहस्पतिवार को रुद्रपुर के शेष गांवों के लोगों की आपत्तियां सुनी जाएंगी। यहां बता दें कि गांव निगम में शामिल हुए तो संबंधित गांव के लोगों की प्रधानी भी छिन जाएगी।
सुबह करीब 11:30 बजे से कलक्ट्रेट सभागार में डीएम डॉ. नीरज खैरवाल की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति के समक्ष निगम के सीमा विस्तार के संबंध में जनसुनवाई शुरू हुई। फुलसुंगी, फुलसुंगा, शिमला बहादुर आदि गांवों के 287 लोगों की सुनवाई कर आपत्तियां और सुझाव लिए गए। हालांकि 287 लोगों की ओर से आपत्तियां दर्ज कराने के बावजूद 62 लोग ही जनसुनवाई में पहुंचे। इनमें से अधिकतर ने निगम में शामिल नहीं होने की बात ही कही।
समिति के सदस्य एडीएम जगदीश चंद्र कांडपाल ने बताया कि बृहस्पतिवार को शेष गांवों बिगवाडा, रुद्रपुर देहात, शिमला बहादुर देहात, लमरा देहात, रम्पुरा देहात, जगतपुर देहात, फाजलपुर महरोला, भूरारानी और कल्याणपुर के लोगों की आपत्तियां और सुझावों पर जनसुनवाई की जाएगी।
समिति की ओर से 23 मार्च को सुबह 11 बजे से नगर निगम काशीपुर, दोपहर एक बजे से नगर पालिका परिषद खटीमा और शाम तीन बजे से नगर पालिका परिषद किच्छा से संबंधित आपत्तियां एवं सुझावों पर जनसुनवाई डीएम कार्यालय में की जाएगी। जनसुनवाई के दौरान एडीएम जगदीश कांडपाल, जिला पंचायत राज अधिकारी विद्या सिंह सौमनाल, मुख्य नगर आयुक्त जय भारत सिंह, तहसीलदार डॉ. अमृता शर्मा मौजूद थे।
गांवों के नगर निगम में शामिल होने से किसानों को काफी नुकसान होगा। उन्होंने ट्यूबवेल लगाने से लेकर अन्य जरूरतों के लिए नगर निगम के चक्कर काटने पड़ेंगे। किसानों को विभिन्न सब्सिडी का लाभ भी नहीं मिल सकेगा।
अजीत प्रकाश, निवासी, फुलसुंगी।
गांवों में अब पर्याप्त सुविधाएं हैं, जबकि नगर निगम सुविधाओं के नाम पर लोगों को गंदगी के सिवाय कुछ नहीं दे रहा है। ट्रांजिट कैंप की बदहाली इसका सुबूत है।
बीना, निवासी, फुलसुंगी।
ग्राम सभा के लोग अपनी आय के लिए कृषि पर निर्भर है। यदि यह क्षेत्र नगर निगम में शामिल हो जाएगा तो किसानों को सब्सिडी समेत अन्य कई नुकसान होंगे।
नीरज कुमार सिंह, निवासी, फुलसुंगी।
फुलसुंगी ग्रामसभा को नगर निगम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इसका अधिकांश क्षेत्र किच्छा विधानसभा में पड़ता है। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
मनीष पांडे, निवासी, फुलसुंगी।