सिद्ध गर्ब्यांग गांव में उड़ने वाली फैक्ट्रियों की काली राख और नदी व नहरों में प्रवाहित दूषित जल की जांच शुरू हो गई है। पीसीबी की टीम सिडकुल अधिकारियों और सिद्ध गर्ब्यांग कल्याण सेवा समिति के पदाधिकारियों के साथ गांव पहुंची और चार हैंडपंप, बैगुल नहर और कैलाश नदी से पानी के दो-दो सैंपल लिए। इसके अलावा खेतीहर भूमि एवं सिडकुल के मुख्य द्वार से मिट्टी के सैंपल लिए, जिनकी जांच भारत सरकार की अधिकृत लैब में होगी।
पिथौरागढ़ के धारचूला ब्लॉक के करीब 250 विस्थापित परिवारों का यहां सिडकुल से सटा सिद्ध गर्ब्यांग गांव बसा है। इस गांव में अक्तूबर 2017 से कंपनियों की चिमनियों से काली राख उड़ने और फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी नहर, नदी और नालों में प्रवाहित होने से गांव के लोगों परेशान है। नौ दिसंबर से गांववासी दूषित जल एवं चिमनियों की काली राख को रोकने के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।
यह मामला पीसीबी, अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग से लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कोर्ट तक जा पहुंचा। बीती 13 मार्च नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कोर्ट के जस्टिस आरएस राठौर ने दो अप्रैल को मामले में सुनवाई की तिथि भी तय कर दी, जिसके बाद पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों में हड़कंप मचा है।
बुधवार को एनजीटी के आदेश पर पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अंकुर कंसल, दिल्ली की सीमा लेबोरेट्री के अधिकारियों के साथ सिद्ध गर्ब्यांग गांव पहुंचे। यहां उन्होंने सिडकुल के अधिकारियों व ग्रामीणों के साथ गांव के चार हैंडपंप और नालों से पानी के सैंपल लिए।
क्षेत्रीय अधिकारी अंकुर कंसल ने बताया कि कैलाश नदी और बैगुल नहर से पानी के दो-दो सैंपल, गांव और औद्योगिक क्षेत्र की सीमा से मिट्टी के दो सैंपल और जिंदल कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट के तीन सैंपल लिए हैं।
बताया कि सैंपल को जांच के लिए भारत सरकार की अधिकृत लैब में भेजे जाएंगे। बृहस्पतिवार को फैक्ट्रियों के ईटीपी की जांच की जाएगी। इस मौके पर सीमा लेबोरेट्री के राकेश कंडारी, सुनील आर्य, अरविंद गुप्ता के अलावा सिडकुल के आरके टैक्ट पीयूष घिल्डियाल, जेई मुकेश मंडल, समिति के अध्यक्ष दान सिंह गर्ब्याल, एडवोकेट पुष्पराज सिंह गर्ब्याल, प्रताप सिंह गर्ब्याल आदि थे।
32 फुट गहरे नल से अब नहीं आता पानी
सितारगंज। सिद्ध गर्ब्यांग गांव में 20 फुट गहराई तक पानी था, लेकिन अब 32 फुट गहरे नल से पानी नहीं आता है। ग्रामीण धन लाल के घर में लगा नल सूखने के बाद मोटर से पानी खींचा जाता है, उसमें भी दूषित पानी निकलता है। इसके अलावा 140 फुट गहरे ग्राउंड लेवल के हैंडपंप भी दूषित पानी दे रहे हैं, जिनके पीसीबी कर्मी ने जांच के लिए सैंपल भरे। ब्यूरो
24 घंटे में वायु प्रदूषण का पता लगाएगी मशीन
सितारगंज। पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली की सीमा लेबोरेट्री की ओर से गांव में छत पर रिस्पायरेबल डस्ट सैंपलर (आरडीएस) मशीन लगाई है, जो 24 घंटे तक वायु प्रदूषण की जांच करेगी। लेबोरेट्री के विशेषज्ञ राकेश कंडारी ने बताया कि हवा में उड़ने वाले धूल के कणों की मात्रा और प्रदूषण को जानने के लिए मशीन लगाई गई है। ब्यूरो
चिमनी के धुएं और काली राख की भी जांच को लगाई मशीन
सितारगंज। पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चिमनी के धुएं उसकी काली राख की जांच के लिए गांव से सटी गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट लिमिटेड कंपनी की चिमनी में मशीन लगाई है जो चिमनी से निकलने वाले प्रदूषण की जांच करेगी। ब्यूरो
गंदे पानी में क्रोमियम की अधिकता कैंसर का कारक
सितारगंज। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अंकुर कंसल ने बताया कि हैंडपंप व नलों में आ रहे दूषित पानी में आयरन और क्रोमियम की मात्रा अधिक हो सकती है। इसके सैंपल लिए गए हैं। नेगर के ओमांश क्लीनिक के डॉ. ओमकार सिंह ने बताया कि पानी में आयरन की अधिकता से गैस और आंतों में इंफेक्शन एवं क्रोमियम अधिक होने से कैंसर होने की संभावना रहती है। ब्यूरो