खटीमा फइबर्स को बैंकों द्वारा सीज किए जाने से बेरोजगार हुए श्रमिक कर्मियों ने गेट पर हंगामा किया। कारखाना कर्मियों ने बैंक के अधिकारियों के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की और उन्हें बेरोजगार करने का आरोप लगाया। मजदूरों की एक महीना बीस दिन का वेतन भी अभी बकाया है।
कारखाना श्रमिकों ने बैंक प्रबंधन पर आरोप जड़ा कि आखिर इतना उधार होने तक क्यों दिया जाता रहा रुपया यह भी जांच का विषय है। मजदूरों ने कहा कि कारखाना दयनीय हालत में था, लेकिन इसके बावजूद एक नहीं तो दो माह में उनकी मजदूरी का भुगतान मिल जाता था, जिससे उनके परिवार पल रहे थे। लेकिन अचानक की गई इस कार्रवाई से उनका भविष्य अंधकार मय हो गया है। कर्मचारियों ने कहा कि भूख और बेरोजगारी से यदि किसी कर्मचारी के साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए बैंक प्रबंधन ही जिम्मेदार होगा जिसने चलते हुए कारखाने को बंद कर मजदूरों को बेरोजगार किया है। कर्मचारियों ने बैंक प्रबंधन के विरुद्ध आरपार की लड़ाई का निर्णय लिया। इस अवसर पर एसके शर्मा, सुरेंद्र बिष्ट, राम केवल, चुन्नी लाल, रुद्रपाल, राजीव सक्सेना, हरि सिंह, मोइन खान, रामचंदर, शाहिद, रुद्रप्रताप, जीवन आर्य, हरि सिंह, जीवन अधिकारी, राम बहादुर, रामबाबू, अनिल आदि थे।