विश्व बाजार में अपना उत्पाद आपूर्ति करने वाली खटीमा फाइबर्स लिमिटेड लगभग 300 करोड़ रुपए के बकाए के चलते सीज हो गई है। बैंक ऑफ बड़ौदा और आईसीआईसीआई बैंक ने बकाया वसूली न होने पर जिलाधिकारी के निर्देश में सरफ्रेसी अधिनियम धारा-14 के तहत अपना पजेशन ले लिया। इस कार्रवाई में लगभग दो घंटे का समय लगा। डीएम के निर्देशन में तहसीलदार (सितारगंज) आरसी गौतम ने पुलिस की मदद से कारखाना के सीएमडी, मैनेजर, सिक्योरिटी सहित समस्त कर्मचारियों को बाहर खदेड़ा और कारखाने के प्रत्येक प्लांट के मुख्य एवं सह द्वारों में ताले जड़कर उसे सीज कर दिया। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई है।
वर्ष 1988 में स्थापित खटीमा फाइबर्स की स्थापना राकेश चंद्र रस्तोगी ने छोटे से स्तर पर की थी। तब कागज के गत्ते और डिब्बे का उत्पादन होता था। 90 के दशक में बीओबी शाखा खटीमा और आईसीआईसीआई बैंक नई दिल्ली के आर्थिक सहयोग से कागज का भी उत्पादन होने लगा। ऋण की अदायगी नहीं होने पर लगभग 300 करोड़ का बकाया खटीमा फाइबर्स पर हो गया। पुलिस फोर्स के साथ कारखाने में ताला ठोकने पहुंचे बीओबी के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक श्याम लाल माली और वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि 31-03-2011 से बीओबी एवं 2008 से आईसीआईसीआई बैंक का भुगतान नहीं हुआ है। बैंक के अधिकारियों ने बताया कि ऋण के एवज में लीज वाली 162 बीघा जमीन बंधक बनाई गई है। उन्होंने कारखाने पर ब्याज सहित लगभग तीन सौ करोड़ की रकम बताई।
खटीमा फाइबर्स का बैंक अधिकारियों को कब्जा दिलवाने में कोतवाली पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान कोतवाल अजय ध्यानी, झनकैया थाना प्रभारी डीएस फर्त्याल, एसआई सुनील सिंह बिष्ट, माहेश्वर सिंह मय फोर्स के साथ मौजूद थे। इस दौरान कारखाने के सुरक्षा कर्मचारियों, मैनेजर सहित डायरेक्टर सीएमडी के साथ धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने बल पूर्वक इन्हें कारखाने से बाहर धकेला। बैंक के अधिकारियों में संजीव कुमार, इमरान हुसैन, अशोक तिवारी, आशीष तिवारी आदि थे।