सितारगंज। जेल में सजायाफ्ता के लिए महज प्रताड़ना नहीं बल्कि सुधार गृह भी होता है। यह बात केंद्रीय कारागार सितारगंज पर एकदम सटीक बैठती है। जहां शिक्षा और कौशल विकास के जरिए कैदियों के अंधेरे जीवन में उजाला लाने का प्रयास किया जा रहा है। यहां बंद कैदी उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने अंधकार जीवन को प्रकाशमय करने के प्रयास में जुटे हैं जिससे कि वह जेल से छूटने के बाद समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।
केंद्रीय कारागार में बंद करीब 18 कैदी इस समय उत्तराखंड बोर्ड से हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई कर रहे हैं। इनके लिए रोजाना चार-पांच घंटे कक्षाओं का संचालन किया जाता है। बंदी नौशाद ने बताया कि वह हाईस्कूल, इंटर और स्नातक में अध्ययनरत बंदियों को गणित, अर्थशास्त्र, हिंदी, अंग्रेजी के साथ अन्य विषय पढ़ा रहे हैं। बताया कि पिछले साल इंटर की परीक्षा पास करने वाले 13 बंदी इस साल इग्नू से बीए की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
संगीत में रुचि रखने वाले कैदियों के लिए भी कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। संगीत सिखा रहे बंदी गोल्डी सैंथोजी ने बताया कि जेल प्रशासन ने उन्हें गिटार, ढोलक, ड्रम, हारमोनियम, पियानो आदि वाद्ययंत्र उपलब्ध कराए हैं। वह रोज दो से तीन घंटे 19 बंदियों को संगीत सीखा रहे हैं।
वर्जन
सजायाफ्ता और विचाराधीन बंदियों को पढ़ने के लिए नियमित रूप से पुस्तकें, नोट्स और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। शिक्षा, सुधार की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रही है। पढ़ाई से बंदियों की सोच में सकारात्मक बदलाव आ रहा है जिससे कि रिहाई के बाद उन्हें समाज में नई पहचान मिल सकेगी।
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अनुराग मलिक, जेल अधीक्षक, सितारगंज