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जेल की भूमि पर होगी औषधि की खेती

Sun, 27 Mar 2016 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
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टी डी जोशी - फोटो : Amar Ujala
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संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) एवं सेंट्रल जेल में आयुर्वेदिक औषधि की खेती होगी। इसके लिए कारागार विभाग द्वारा पंतनगर से गिलॉय, एलोवीरा, इस्टीविया आदि औषधि की नर्सरी लेने के लिए प्लान किया जा रहा है। इसके अलावा ग्लोडोलिस और गुलाब के फूलों का भी उत्पादन किया जाएगा। इससे खुली जेल में बंदी और सेंट्रल जेल में कैदियों के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे और उन्हें सीखने का भी मौका मिलेगा। वहीं, जेल की आय में भी दोगुनी बढ़ोतरी होगी।

  वर्ष 1960 में करीब पांच हजार 965 एकड़ भूमि पर स्थापित संपूर्णानंद खुली जेल वर्तमान में 640 एकड़ जमीन पर ही रह गई है। जिसमें करीब डेढ़ सौ एकड़ जमीन पर गेहूं, धान और गन्ने की खेती हो रही है। 90 एकड़ जमीन पर सेंट्रल जेल बनी है। सड़क, नदी व नालों में करीब डेढ़ सौ एकड़ जमीन समाहित है। 40 एकड़ जमीन बरा क्षेत्र में बंजर है। शेष भूमि पर खुली जेल के भूखंड, आवास आदि बने हुए हैं। कारागार विभाग अपनी आय के साधन बढ़ाने के लिए खाली पड़ी जमीन पर औषधि एवं फूलों की खेती करने की तैयारी में है।
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  कारागार विभाग की मानें तो सेंट्रल जेल में कैदियों के बैरकों को छोड़ दें तो करीब 60 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। इसके अलावा नदी, नालों समाहित जमीन में से करीब सौ एकड़ जमीन बंजर है। जिस पर विभाग द्वारा जल्द ही गिलॉय, एलोवीरा, इस्टीविया आदि औषधीय उत्पादनों की खेती की जाएगी। इसके अलावा ग्लोडोलियस व गुलाब आदि प्रजाति के फूलों का भी उत्पादन होगा।
  इसके लिए कारागार विभाग पंतनगर से औषधि की नर्सरी व फूलों का बीज लेगा। औषधि की खेती के लिए विभाग हरिद्वार के हर्बल प्रोडक्ट उत्पादकों से वार्ता भी कर रहा है। विभाग की इस पहल से जेल में रहने वाले कैदियों व बंदियों के लिए जहां रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे। वहीं, कैदी और बंदी औषधि की खेती करना भी आसानी से जान सकेंगे। जेल की जमीन पर औषधि व फूलों की खेती होने पर विभाग की आय में भी इजाफा होगा। वर्तमान में धान, गेहूं व गन्ने की फसल से जेल को करीब सालाना 50 लाख की आय होती है। जो बढ़कर दोगुनी हो जाएगी।
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औषधि पौधों के फायदे
गिलॉय-मौसमी बुखार की दवा बनाने में सहायक।
एलोवीरा-पेट की बीमारियों व सौंदर्य प्रसाधन के प्रोडक्ट बनाए जाते हैं।
इस्टीविया-शुगर की बीमारी के इलाज के लिए टेबलेट बनाई जाती है।

फूलों से होने वाले लाभ
ग्लोडोलियस-इस फूल के तने लंबे होते है और पीले, लाल व जामुनी रंग के इन फूलों से बुकें बनाई जाती हैं।
गुलाब-इसकी खेती होने पर गुलाब जल बनाने के लिए जेल में ही प्लांट लगाया जा सकता है। 


हर्बल प्रोडक्ट की खेती के लिए हरिद्वार के हर्बल उत्पादकों से वार्ता की जा रही है। पंतनगर से नर्सरी लेने के लिए प्लान किया जा रहा है। विभाग से अनुमति मिलने के बाद जेल की जमीन पर औषधि व फूलों की खेती की जाएगी। इससे जेल की आय दोगुनी हो जाएगी। इसके लिए एनजीओ व उद्योगों से सहयोग भी मांगेंगे।
-टीडी जोशी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल), सितारगंज
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