आज भी चार साल पहले शारदा नहर के जल प्रलय को याद आते ही लोहियाहेड पावर हाउस का स्टाफ हो या चौड़ापानी, नगरा तराई क्षेत्र के लोग सहम जाते हैं। अब पावर हाउस प्रशासन ऐसे जल प्रलय को न्यून करने के लिए सजग हो गया है। प्रबंधन ने उत्तराखंड जल विद्युत निगम बोर्ड को बाईपास नहर के लिए प्रस्ताव भेजा है।
वर्ष 1955 में स्थापित पावर हाउस में तीन टरबाइनों से बिजली उत्पादन होता है। निर्माण के समय से ही पावर हाउस में बाईपास नहर का प्रावधान नहीं है। बल्कि पावर हाउस से करीब एक किमी दूर जरूरत पड़ने पर पानी बाईपास की व्यवस्था की गई। इसमें अक्सर मशीन ट्रिप और डिफ्यूजर न खुलने की दशा में जल प्रलय की आशंका बनी रहती है।
ऐसा वाक्या बीते 31 अगस्त 2014 को सामने आ चुका है तब पावर हाउस की मशीनों के ट्रिप व डिफ्यूजर न खुलने से पानी ने बैक मारते ही जल सैलाब में एक श्रमिक की मौत, पावर हाउस, लोहियाहेड कॉलोनी से लेकर चौड़ापानी, नगरा तक तबाही मची। तबाही के बाद मरम्मत कार्य पूरा हो गया है।
बीते वर्ष दिसंबर में प्रबंधन ने पुराने डिफ्यूजरों को भी बदलने का कार्य शुरू हुआ, जो अभी भी जारी है। लेकिन अभी भी जल प्रलय से बेहतर बचाव के लिए पावर हाउस में बाईपास बनाने की जरूरत है। बताया कि देश भर में अधिकांश जल विद्युत परियोजनाओं में बाईपास है, लेकिन छह दशक पुराना होने से लोहियाहेड में इसका प्रावधान नहीं है। डीजीएम महकार सिंह ने बताया कि निगम स्तर पर बाईपास नहर के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है। आगे भविष्य में निर्णय होने की उम्मीद जताई।