रुद्रपुर कलक्ट्रेट में हुई जिला योजना की बैठक में उस वक्त माहौल गरमा गया जब कांग्रेस विधायकों ने उनसे योजनाओं के प्रस्ताव नहीं लेने पर नाराजगी जताई। उन्होंने प्रभारी मंत्री को पिछली बैठक में दिए उनके निर्देशों को भी याद दिलाया। कांग्रेस के तीन विधायक और एक विधायक प्रतिनिधि बैठक का बहिष्कार कर कलक्ट्रेट के गेट पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने अधूरे कोरम में हुई बैठक को अवैध करार दिया और दोबारा बैठक कराने की मांग की।
बृहस्पतिवार दोपहर कलक्ट्रेट सभागार में जिले के प्रभारी मंत्री गणेश जोशी की अध्यक्षता में बैठक शुरू की गई। किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ बोले कि तीन-चार विभागों को छोड़कर अन्य विभागों ने उनसे योजनाओं के प्रस्ताव ही नहीं लिए। पिछली बैठक में यह मामला उठा था। मंत्रीजी आपने विभागों के अधिकारियों को विधायकों के प्रस्ताव लेकर उनसे चर्चा कर शामिल करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद आपके सम्मान में जिला योजना की बैठक में बजट स्वीकृति हुई थी, लेकिन इस बार भी पिछले साल की कहानी दोहराई गई थी। सैकड़ों पन्नाें की बुकलेट भी उनको आज ही दी गई।
बैठक में मौजूद उपनेता प्रतिपक्ष व खटीमा विधायक भुवन चंद्र कापड़ी, जसपुर विधायक आदेश चौहान और बाजपुर विधायक यशपाल आर्य के प्रतिनिधि डीके जोशी ने बेहड़ की बात का समर्थन दिया। मंत्री जोशी ने बैठक को आगे बढ़ाया, लेकिन थोड़ी देर में बेहड़ कुर्सी से खड़े हुए और बैठक छोड़कर सदन से बाहर चले गए। उनके पीछे कापड़ी, चौहान और जोशी भी चले गए। इसके बाद उन्होंने कलक्ट्रेट गेट पर धरना दिया और अपूर्ण कोरम पर बैठक को निरस्त करने की मांग की। कहा कि अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। बेहड़ और कापड़ी ने कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे।
विधायकों के प्रस्ताव जिला योजना में शामिल नहीं किए गए। बिना विधायकों के अनुमोदन के जिला योजना की बैठक हो रही है। उनके माध्यम से न तो योजनाओं के प्रस्ताव लिए गए और न ही चर्चा की गई। जो पत्र उनकी ओर से विभागों को भेजे जाते हैं, उनको योजना में शामिल कर लिया जाता है। उनके बारे में भी चर्चा नहीं होती है। पिछली बार भी यह हुआ और इस बार भी यह हुआ है। सत्ता पक्ष का एक भी विधायक बैठक में शामिल नहीं हुआ। बैठक में मौजूद विपक्ष के चार लोगों के योजनाएं जिला योजना में शामिल नहीं की। बिना कोरम पूरे किए बैठक की गई है। मंत्री से बैठक निरस्त करने का आग्रह कर किया गया था ताकि विधायकों के प्रस्ताव शामिल कर दोबारा परिव्यय लाया गया। लेकिन अवैध बैठक का मुखर विरोध करेंगे।
जिला पंचायत में 13 प्रतिनिधि हैं और इनमें से एक ही बैठक में शामिल हैं। चार लोगों ने बैठक का बहिष्कार किया है। जिला योजना के 42 में से तीन चार विभागों को छोड़कर कोई अधिकारी किसी जनप्रतिनिधि से प्रस्ताव नहीं लेते हैं। अधिकारी अपने कमरों में बैठकर प्रस्ताव बना लेते हैं। मंत्री से पिछली बार भी शिकायत की गई थी। मंत्री ने अधिकारियों को विधायकों से प्रस्ताव लेने और चर्चा करने के आदेश दिए थे। लेकिन फिर से इस बार अधिकारियों ने मनमानी की। बुकलेट चार से पांच दिन पहले दी जानी चाहिए। बैठक में जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में लाए और चर्चा किए बिना प्रस्ताव लाए गए, जो जनहित में नहीं है। एक सदस्य पर जिला योजना की बैठक की गई है। हमने बैठक का बहिष्कार किया है और विधानसभा में इस पर चर्चा की जाएगी।
- भुवन कापड़ी, उपनेता प्रतिपक्ष/ विधायक खटीमा
यह जिला योजना नहीं लूट योजना है। यहां पर अपने चहेतों की योजनाएं रखी जाती हैं। जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव लेकर बुकलेट बननी चाहिए, लेकिन बुलकेट हाथों हाथ बैठक में दी जा रही है। 42 विभागोंं में से दो से तीन दिन पहले तीन चार विभाग के अधिकारी उनके पास प्रस्तावों के संबंध में आए थे। इसके अलावा अन्य विभागों के अधिकारी न उनको जानते हैं और न वे अधिकारियों को जानते हैं। 75 करोड़ की जिला योजना की लूट करने को अधिकारी बैठे हैं। अगर अधिकारियों ने बैठक में योजनाएं पास करनी है तो विधायकों की जरूरत क्या है।- आदेश चौहान, विधायक, जसपुर
जिला योजना का कोरम पूरा है। पिछले बार भी विधायकों से प्रस्ताव लिए गए थे और इस बार भी विधायकों से प्रस्ताव लिए गए हैं। सीडीओ ने भी विधायकों से बात कही है। निर्माण कार्यों के जो प्रस्ताव हैं, वो विधायकों से बात कर योजना में लिए गए हैं। कोरम अधूरा और प्रस्ताव नहीं लेने के आरोप सही नहीं है। -नितिन सिंह भदौरिया, डीएम।
प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई बैठक