मूंज, खजूर के पत्ते और कसेरा से बर्तनों का कर रही हैं निर्माण
गदरपुर। साधना ग्राम संगठन खेमपुर की बुक्सा जनजाति की महिलाएं एनआरएलएम योजना से जुड़कर अपनी सांस्कृतिक विरासत को आजीविका से जोड़कर मूंज, खजूर, कसेरा और कृत्रिम प्लास्टिक से बर्तनों का निर्माण कर रहीं हैं। यह बर्तनों का इस्तेमाल रोटी, अनाज और सब्जियां रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। शादी ब्याह के मौके पर ग्रामीण इलाकों में मूंज से बने बर्तनों में खाना पैक किया जाता है।
बुक्सा जनजाति बाहुल्य ग्राम खेमपुर में वर्ष 2019 में गठित साधना ग्राम संगठन खेमपुर की अध्यक्ष विद्या देवी, सचिव कमला देवी और कोषाध्यक्ष पार्वती देवी के मार्ग दर्शन में महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 30 महिलाएं कार्य करती हैं। महिलाओं ने ग्रामीण क्षेत्र में बहुतायत में पाई जाने वाली मूंज, खजूर के पत्ते, कसेरा और कृत्रिम प्लास्टिक को वह अपने उत्पाद में प्रयोग करती हैं। मात्र दस हजार रुपये से अपना कारोबार शुरू करने वाली महिलाएं समूह के माध्यम से बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण लेकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ी। समूह की महिलाएं अब तक करीब 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर चुकी हैं। केंद्र सरकार की एनआरएलएम से जुड़ने के बाद उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हुई है।
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बर्तनों में तोता, हाथी, घोड़ा और बरात की होती है चित्रकारी
बर्तनों में तोता, हाथी, घोड़ा और बरात आदि का सुंदर चित्रकारी की जाती है, जो लोगों को आकर्षित करती है। यह उत्पाद खासतौर से गांव की शादियों में बहुत लोकप्रिय हैं। संवाद
ऐसे करती हैं प्राकृतिक चीजों का उपयोग
इन उत्पादों लिए महिलाएं पारंपरिक तरीके से खजूर के पत्तों पर रंग करती हैं। सबसे पहले पत्तियों को गर्म पानी में डालकर उबाला जाता है, फिर अलग अलग रंग डालकर खूब गरमाया जाता है। एक बर्तन को बनाने में पंद्रह दिन तक का समय लगता है। पारंपरिक तरीके से तैयार किए जाने वाले उत्पाद महंगे होते हैं। संवाद
कोट-महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार कल्याणकारी योजनाएं लागू कर रही है। महिला सशक्तिकरण के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत एनआरएलएम महिलाओं की पहली पसंद बना हुआ है।- अतिया परवेज, बीडीओ, गदरपुर