रुद्रपुर। गदरपुर पुलिस ने सात साल पहले अदालत में अवैध शराब और उपकरणों के आधार पर पूरा मुकदमा खड़ा किया मगर वही न्यायालय के समक्ष पेश नहीं कर सकी। नतीजतन पंचम अपर सीनियर सिविल जज शमा परवीन ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
दो अक्तूबर 2019 को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर गदरपुर पुलिस क्षेत्र में गश्त कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि विक्रमनगर गांव के पास बरैत नदी किनारे एक व्यक्ति कच्ची शराब तैयार कर रहा है। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और निगरानी के बाद रामचंद्रपुर निवासी सुरजन सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का दावा था कि आरोपी मौके पर भट्ठी जलाकर कच्ची शराब तैयार कर रहा था। वहां से लगभग 60 लीटर अवैध शराब, भट्ठी और शराब बनाने के उपकरण बरामद किए गए।
आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की सबसे बड़ी कमजोरी सामने आई। जिस शराब और उपकरणों की बरामदगी के आधार पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, वही माल कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि जब कथित बरामद वस्तुओं का अस्तित्व ही न्यायालय के समक्ष साबित नहीं किया गया तो बरामदगी के दावे को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इतना ही नहीं, अभियोजन पक्ष किसी प्रत्यक्षदर्शी पुलिसकर्मी या स्वतंत्र गवाह को भी अदालत में पेश नहीं कर सका। केवल लैब परीक्षण रिपोर्ट से संबंधित सेवानिवृत्त आबकारी निरीक्षक विक्रम सिंह भंडारी की गवाही ही दर्ज कराई गई। अदालत ने टिप्पणी की कि पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद अभियोजन साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा। ऐसे में आरोपी के विरुद्ध अपराध संदेह से परे सिद्ध नहीं होता। न्यायालय ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए सुरजन सिंह को संदेह का लाभ प्रदान कर आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।