रुद्रपुर। एचआईवी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के साथ ही 15 स्वयंसेवी संस्थाएं भी जागरुकता अभियान चला रही हैं। इसके साथ ही एचआईवी संक्रमित मरीजों को (इंटीग्रेटेड काउसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर)के जरिए जरुरी इलाज दिया जा रहा है। विभाग के अनुसार अप्रैल 2024 से अप्रैल 2025 तक 104 लोग संक्रमित पाए गए थे। अप्रैल से अब तक 57 लोग एचआइवी संक्रमित पाए गए हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. केके अग्रवाल का कहना हैं कि एड्स को लेकर मरीजों को संकोच नहीं करना चाहिए बल्कि जागरुक और संयम बरतना चाहिए। किसी भी दशा में असुरक्षित यौन संबंध व संक्रमित सुई का उपयोग नहीं करना चाहिए। बताया कि 95 प्रतिशत रोगी संक्रमित सुई के उपयोग से एचआईवी का शिकार हो रहे हैं।
सही इलाज से बीमारी पर हासिल हो सकती है जीत
एचआईवी संक्रमित हो चुकी एक युवक ने बताया कि वर्ष 2022 में हल्का बुखार आने पर डॉक्टर की सलाह पर उन्होेंने जांच कराई थी। इसमें वे पॉजिटिव निकले थे। शुरुआत में वे डिप्रेशन में चले गए थे। परिवार और डॉक्टरों के सपोर्ट से उन्होंने एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) शुरू की। आज उनका वायरल लोड (एचआईवी वायरस की मात्रा) काफी कम हो चुका है, और वे रोजगार भी कर रहे हैं। वे अब एक संस्था से जुड़कर लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने में जुटे हैं। उनका कहना है कि एचआईवी ने उनको जीवन का नया अर्थ समझाया है। वे दूसरों को बताते हैं कि सही इलाज और सपोर्ट से इस बीमारी पर जीत हासिल किया जा सकता है।
बेटी से मिली जीने की राह
इस रोग की चपेट में आ चुकी एक महिला ने बताया कि एचआईवी पॉजिटिव की जानकारी के समय वह गर्भवती थी। रिपोर्ट मिलने के बाद उनको लगा कि जीवन खत्म हो गया है और वह तनाव में रहने लगी थी। डॉक्टरों ने कोई गलत कदम नहीं उठाने की बात समझाई। 2020 में डॉक्टरों ने उन्हें एआरटी और सुरक्षित डिलीवरी की सलाह दी। उनकी बेटी स्वस्थ पैदा हुई और एचआईवी-नेगेटिव है। कहती हैं कि बेटी ने उनको जीने का कारण दिया। वह लोगों से कहती हैं कि मां बनने का सपना एचआईवी नहीं रोकता है। वह एक निजी कंपनी में काम कर लोगों को जागरूक कर रही हैं।