जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर के सीबीएसएच काॅलेज में भौतिक विज्ञान की प्राध्यापक डाॅ. दीपिका पी. जोशी ने शोधार्थी नीतू बोरा की मदद से ऐसी तकनीक विकसित की है जिसमें तापमान का भंडारण, पदार्थ का तापमान और उसकी आकृति स्थिर बनी रहती है। इसके जरिये अब पानी और खाने को लंबे समय तक गर्म रखा जा सकेगा।
यही नहीं, इसमें ऊष्मा का रिसाव भी नहीं होता है। तकनीक का पेटेंट फाइल होने के बाद हाल ही में इसे इंडियन जर्नल में प्रकाशित भी किया जा चुका है। डाॅ. दीपिका ने बताया कि उन्होंने सिलिका के नैनो कणों को काॅपर पर डिपाॅजिट कर एक संयुक्त मिश्रण बनाया है। इसमें सिलिका सेल है और बीच में काॅपर का कोर है। इस मिश्रण को एक विशेष अनुपात में पैराफिन (मोम) में फिक्स किया गया है। संवाद
तकनीक में ऊष्मीय चालकता थर्माकोल से अच्छी
इस तकनीक में ऊष्मीय चालकता थर्माकोल से बेहद अच्छी है। इससे तापमान लंबे समय तक स्थिर रहता है। आकृति में भी कोई परिवर्तन नहीं होता। थर्माकोल निश्चित तापमान के बाद डी-कंपोज होने लगता है, जबकि नई तकनीक में यह समस्या कतई नहीं है। यह पदार्थ टाॅक्सिक नहीं है और पर्यावरण के अनुकूल है।
शोध टीम को बधाई। तकनीक के तहत यदि किसी इक्विपमेंट पर इसकी कोटिंग की जाए तो वह बहुत सस्ती, हल्की और टिकाऊ होगी। थर्माकोल के खर्च और इससे होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी। यह तकनीक लेबोरेट्री के ओवन की क्षमता को बढ़ाएगी।लागत को भी कम करेगी। यह तकनीक चाय, पानी व खाना आदि गर्म रखने वाले इक्विपमेंट (हाॅटपाॅट, थर्मस, गीजर, ओवन) के आकार व लागत को किसी हद तक न्यूनतम कर देगी। इससे अधिक से अधिक हीट स्टोर की जा सकती है।
- डॉ. मनमोहन सिंह चौहान, कुलपति, जीबी पंत कृषि विवि, पंतनगर