काशीपुर। इस बार मानसून की कम बारिश की मार झेल रहे किसानों को धान की फसल में लगने वाली लाल सूंड़ी व खैरा रोग की चिंता सताने लगी है। खेतों में जिंक की कमी से होने वाला खैरा रोग भी तेजी से फैल रहा है। इस साल मानसून में अब तक अपेक्षा से कहीं कम वर्षा हुई है। काशीपुर तहसील में अब तक कुल 300 एमएम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
धान की फसल में लाल सूंड़ी व खैरा रोग होने से किसानों की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। इन रोगों से धान के तने सूख रहे हैं और पत्तियों का रंग कत्थई हो रहा है, पत्ते लिपट रहे हैं। ग्राम ढकिया निवासी किसान गुल्लू ने बताया कि धान की गोप में लाल रंग की सूंड़ी लग गई है, वो रस चूस रही है। वहीं कुंडेश्वरी क्षेत्र के किसान हरपाल का कहना है कि धान की पत्तियों का रंग कत्थई हो रहा है।
वैज्ञानिकों की सलाह कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय प्रभाकर, डॉ. अनिल चंद्रा ने बताया कि धान की फसल में तना छेदक गुलाबी व पीली सूंड़ी एक गंभीर कीट है। इस कीट की सूड़ियां धान के तने के अंदर घुसकर अंदरूनी हिस्से को खाती हैं। प्रभावी नियंत्रण के लिए कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रतिशत को 8 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से सूखी रेत या खाद में मिलाकर खेत में नमी की स्थिति में भुरकाव करें।