पुलिस ने फर्जी रॉयल्टी बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर एक सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी खनन रायल्टी बनाकर लोगों से रकम वसूल करता था। पुलिस गिरोह में शामिल आरोपी के साथी की तलाश में जुटी है।
सोमवार को कोतवाली में मामले का खुलासा करते हुए एएसपी राजेश भट्ट ने बताया कि सूचना के आधार पर पुलिस ने रविवार को हाईवे स्थित गांव जगन्नाथपुर में देवभूमि कॉमन सर्विस सेंटर पर छापा मारा। जांच के दौरान आनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से फर्जी खनन रायल्टी, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य राजस्व प्रमाणपत्रों को बनाकर लोगों से रकम वसूलने का मामला सामने आया।
सेंटर से लैपटॉप, प्रिंटर सहित अन्य फर्जी बने दस्तावेजों को कब्जे में लेकर संचालक को हिरासत में लिया। जांच में फर्जी रॉयल्टी बनाने की पुष्टि हुई। इसके बाद एसएसआई देवेंद्र गौरव की ओर से संचालक मो. अकरम निवासी जगन्नाथपुर पर धारा 420, 467, 468, 471, 66 (डी) आईटी के तहत मुकदमा दर्ज किया। जांच में गिरोह में शामिल मुख्य आरोपी के साथी आजम निवासी गांव जगन्नाथपुर का नाम सामने आया।
उसकी तलाश में पुलिस जुटी है। आरोपी की निशानदेही पर एक लैपटॉप, दो प्रिंटर, मॉनीटर, स्कैनर, यूपीएस, यूपी की बनी 48 फर्जी रायल्टी, उत्तराखंड की चार, फर्जी रबड़ स्टैंप, 30 पीपीसी कार्ड, 23 डेबिट कार्ड, तैयार फर्जी पैन कार्ड, 6 आरसी, माउस, पैन ड्राइव आदि बरामद हुए हैं। टीम में प्रभारी कोतवाल आईपीएस सर्वेश पवार, सीओ दीपशिखा अग्रवाल, एसएसआई देवेंद्र गौरव, चौकी इंचार्ज विपिन जोशी, अमित जोशी, प्रदीप चंद, सुबोध शर्मा, विक्रांत शामिल थे।
एक साल से चल रहा था फर्जी रायल्टी बनाने का धंधा
बाजपुर। एएसपी ने बताया कि सेंटर पर 2019 से फर्जी खनन रॉयल्टी सहित अन्य राजस्व प्रमाण पत्र बनाने कार्य चल रहा था। सीएससी संचालक एक रायल्टी दो हजार रुपये में बनाकर देता था। जबकि रॉयल्टी का सरकारी रेट 3000 से 3500 रुपये है। इस तरह आरोपी सरकार को राजस्व की हानि पहुंचा रहा था। एएसपी ने बताया कि क्षेत्र के तीन स्टोन क्रशरों केेे नाम की रॉयल्टी बरामद हुई है। इनकी जांच चल रही है। पुलिस अन्य केंद्रों पर भी नजर रखे हुए है। बताया गया कि यूपी क्षेत्र के खनन कारोबारी उत्तराखंड से फर्जी रायल्टी के माध्यम से उपखनिज लेकर जाते हैं। संवाद