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सिडकुल में खुले में शौच को जाते हैं चालक और हेल्पर

Mon, 18 Dec 2017 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
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शौचालय
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सिडकुल में भले ही औद्योगिक विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हों, मगर करोड़ों का माल लाने-ले जाने वाले चालक, हेल्परों के लिए मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। नतीजतन चालक और उनके सहायक खुले में शौच को जाने पर मजबूर हो रहे हैं। सार्वजनिक नल न होने से पानी की किल्लत भी बनी रहती है। फैसिलिटी बाक्स में कुछेक हैंडपंप लगे हैं, लेकिन वे भी बदहाल हैं।
सिडकुल में 500 से अधिक उद्योग स्थापित हैं। इनमें रोजाना सैकड़ों वाहन कच्चा माल लाने और तैयार माल ले जाने के लिए पहुंचते हैं। कईं बार तो एक सप्ताह तक माल लेने के लिए कंटेनरों को इंतजार करना पड़ता है। सिडकुल ने सेक्टर आठ में वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की है, लेकिन शुल्क अधिक होने की वजह से चालक अपने वाहनों को विभिन्न सेक्टरों में खाली पड़े बड़े प्लाट में खड़ा कर देते हैं। ये प्लाट अस्थायी पार्किंग स्थल बन गए हैं, लेकिन यहां वाहन खड़ा करने वालों के लिए न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही सार्वजनिक शौचालय। इस वजह से इन्हें खुले में शौच जाना पड़ता है। यह दिक्कत केवल चालक, हेल्परों की नहीं है बल्कि फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों को भी लघुशंका के लिए सड़क किनारे झाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है।
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छह फैसिलिटी ब्लाक में लटके हैं ताले
रुद्रपुर। सिडकुल में श्रमिकों और चालकों को सस्ते दामों में खाना और शौचालय की व्यवस्था के लिए विभिन्न सेक्टरों में छह फैसिलिटी ब्लाक बनाए गए थे। हर ब्लाक में पांच दुकान, कैंटीन के साथ ही सुविधाओं से लैस शौचालय भी था। हर ब्लाक में एक हैंडपंप भी लगाया गया था, लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते ये ब्लाक शुरू नहीं हो सके। यहां तक कि शौचालय के ताले तक नहीं खोले जा सके। इस वजह से श्रमिकों को सस्ते खाने के लिए भटकना पड़ता है और शौच के लिए खुले में जाना पड़ता है। ब्लाक बने छह साल हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि एक बार फैसिलिटी ब्लाक की नीलामी भी हुई थी, लेकिन संचालकों ने चलाने में हाथ खड़े कर वापस सिडकुल को लौटा दिया 
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