शिक्षा का अधिकार नाम भर का है, नगर निगम रुद्रपुर की कृष्णा कॉलोनी और मोदीपुरम की 124 बेटियों के अब तक स्कूल का मुंह नहीं देखने से तो यही लगता है। कहने को सरकार सर्व शिक्षा अभियान पर जमकर पैसा बहा रही है, लेकिन धरातल पर नजर कुछ नहीं आ रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों की बात क्या करें, जिला मुख्यालय में एनएसएस स्वयंसेवियों के सर्वे में जो आंकड़े सामने आए वह शिक्षा विभाग और सरकार के दावों को आइना दिखाने के लिए काफी हैं।
जनता इंटर कॉलेज की एनएसएस इकाई का ट्रांजिट कैंप के न्यू वुडलैंड स्कूल में एनएसएस शिविर चल रहा है। शिविर में महात्मा गांधी सदन और सुभाष चंद्र बोस सदन के स्वयंसेवियों ने स्कूल नहीं जाने वाली और ड्रॉपआउट कर चुकी लड़कियों का सर्वे किया। इस दौरान स्वयंसेवियों ने पाया कि क्षेत्र की 124 लड़कियों ने स्कूल ही नहीं देखा है। वहीं 25 फीसदी युवतियां ऐसी हैं जिन्होंने विवाह होने की वजह से पढ़ाई आधे में ही छोड़ दी है। शहीद भगत सिंह सदन के स्वयंसेवियों ने मोदीपुरम में मतदाता जागरूकता अभियान चलाया। सर्वे में पता चला कि क्षेत्र के 133 लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है।
वहीं 15 लोगों के गलत नाम दर्ज हैं तो 12 मतदाताओं के नाम सूची से कट गए हैं। सर्वे के दौरान उन्होंने लोगों से लड़कियों को स्कूल भेजने की गुुजारिश की। कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा के खिलाफ नुक्कड़ नाटक पेश किया। वहां पंकज कुमार, मनोज सिंह, सुरेश गुप्ता, भास्करानंद, महेश कुमार, अनिल कन्नौजिया, आकाश चौधरी, अमीर दास, धर्मेंद्र कुमार आदि थे।
शिक्षा पर बेटियों का पहला हक है। एक बेटी की पढ़ाई से दो परिवारों का भविष्य संवरता है। जिन लोगों का मतदाता सूची में नाम नहीं है उनसे 25 जनवरी तक फार्म भरकर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने को कहा गया है।
- मनोज जौहरी, कार्यक्रम अधिकारी
बालिकाओं के स्कूल न जाने का मामला मेरे संज्ञान में आया था। मैंने संदेश भिजवाया है कि परिजन अपनी बालिकाओं को स्कूल भेजें। इस पर होने वाले खर्च की व्यवस्था की जाएगी।
राजकुमार ठुकराल, विधायक रुद्रपुर
मामला संज्ञान में नहीं है, न ही इस तरह की कोई सर्वे रिपोर्ट मिली है। अगर रिपोर्ट मिलती है तो इस मामले में उचित कदम उठाए जाएंगे।
डॉ. पीएन सिंह, सीईओ