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डॉक्टर के बिना चल रहा सितारगंज का ईएसआई अस्पताल

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सितारगंज में बंद पड़ा ईएसआई के चिकित्साधिकारी का कार्यालय और इलाज कराने को जमा मरीजों की भीड़। - फोटो : SITARGANJ
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सितारगंज। औद्योगिक आस्थान सिडकुल और अन्य फैक्ट्रियों में कार्यरत कामगारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए चल रहा ईएसआई अस्पताल डॉक्टर विहीन है। अस्पताल के दो डॉक्टरों के पदों पर सालों से स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई। विभाग ने नाममात्र के लिए संविदा पर एक डॉक्टर की नियुक्ति की है। वो भी छुट्टी पर गए हुए हैं। उनकी गैरहाजिरी में चीफ फार्मेसिस्ट ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
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2014 में सिडकुल से सटे गांव सिद्ध गर्ब्यांग में किराए के भवन में ईएसआई अस्पताल खोला गया। तत्कालीन श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने अस्पताल का शुभारंभ किया था। वर्तमान में अस्पताल में करीब 5000 श्रमिक पंजीकृत हैं। इनमें से प्रतिदिन 50 से 100 मरीजों तक की ओपीडी होती है। विभाग के अनुसार स्थापना के बाद दो से तीन साल तक तो नियमित डॉक्टरों की नियुक्ति होती रही। उसके बाद अस्पताल में सिर्फ संविदा पर एक ही डॉक्टर को नियुक्त किया गया है। जबकि एक पद अभी भी खाली पड़ा है। उनके भी छुट्टी पर चले जाने से चीफ फार्मेसिस्ट पर ही ओपीडी में मरीजों का इलाज करने का जिम्मा रहता है। अस्पताल का भवन भी जर्जर है।
रेफरल सेंटर बन गया है ईएसआई अस्पताल
सितारगंज। ईएसआई अस्पताल में न तो एक्स-रे की सुविधा है और न ही खून व अन्य जांच होती हैं। अस्पताल में आने वाले श्रमिकों की महिलाओं के इलाज की भी कोई सुविधा नहीं है। संसाधनों की कमी के कारण अस्पताल में सिर्फ सदी, खांसी व जुकाम जैसे मामूली रोगों का ही इलाज किया जाता है। गंभीर रोगों पर ईएसआई से जुड़े बाहरी अस्पतालों को मरीज को रेफर कर दिया जाता है। संवाद
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नगर में खुलना चाहिए ईएसआई का अस्पताल
सितारगंज। ईएसआई से जुड़े मरीजों ने नगर या फिर सिडकुल में ईएसआई अस्पताल खोलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सिडकुल व नगर से दूर अस्पताल में परिवार का इलाज कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डॉक्टर के स्वास्थ्य जांच का परामर्श देने पर जांच कराने के लिए भी नगर की पैथोलॉजी आना पड़ता है और फिर पैथोलॉजी से जांच रिपोर्ट लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। इससे भारी परेशानी होती है।
प्रदेश में डॉक्टरों की समस्या है। कई बार शासन को डॉक्टरों की नियुक्ति का अधियाचन भेजा। लेकिन स्थायी डॉक्टर नहीं मिल सके। संविदा पर एक डॉक्टर की नियुक्ति की गई है। अस्पताल को नगर में स्थापित करने के लिए भी शासन से भूमि की मांग की जा रही है।
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-डॉ. आकाशदीप सिंह, सीएमओ ईएसआई देहरादून।
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