एनएच 74 में हुए भूमि मुआवजा घोटाले की सीबीआई जांच की मांग पर केंद्र का साथ न मिलने से दबाव में आए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अब विशेष जांच दल के बहाने बात को संभालने की कोशिश में हैं। रुद्रपुर पहुंचे मुख्यमंत्री की यह मजबूरी यहां कार्यक्रम में खुलकर सामने आई। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि मामले की सीबीआई जांच की मांग केंद्र ने स्वीकार नहीं की। मुख्यमंत्री को कहना पड़ा कि मजबूरी में गठित की गई एसआइटी बेहतर काम कर रही है।
कांग्रेस के शासनकाल में भाजपा केंद्र के साथ ही प्रदेश में भी सरकार आने पर भ्रष्टाचार के मामलों की सीबीआई जांच कराने का दावा करती थी। भाजपा के सत्ता में आते ही एनएच 74 में 300 करोड़ से अधिक का भूमि मुआवजा घोटाला उजागर हुआ। दस मार्च को एडीएम प्रताप शाह ने एसडीएम, तहसीलदार, चकबंदी अधिकारी, किसानों और एनएचएआई के अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कराया था। भाजपा के पास विपक्षी कांग्रेस को जवाब देने के लिए सीबीआई जांच का हथियार था। त्रिवेंद्र सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर हथियार का इस्तेमाल भी किया, लेकिन सीबीआई ने जांच लेने से इनकार कर दिया।
विपक्ष में रहकर हर घपले की सीबीआई जांच की मांग करने वाली भाजपा को अब सीबीआई जांच नहीं होने का सवाल असहज कर रहा है। इसी से बचने के लिए अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत विशेष जांच दल की जमकर पीठ थपथपाते दिख रहे हैं। मंगलवार को रुद्रपुर पहुंचे मुख्यमंत्री को जनता के सामने यह कहना पड़ा कि सीबीआई ने एनएच घोटाले की जांच नहीं ली तो उन्होंने एसआईटी को जांच सौंपी। एसआईटी को बधाई दी कि उन्होंने दस आरोपियों को जेल भेज दिया है। बाद में वे पत्रकारों से बातचीत में एनएच घोटाले में हरीश रावत को राजस्व को हानि पहुंचाने पर अपराधी करार देने से नहीं चूके। केंद्र और राज्य में सरकार के बावजूद एनएच घोटाले की सीबीआई जांच नहीं होने पर विपक्षी कांग्रेस लगातार हमलावर है और पूर्व सीएम हरीश रावत मोर्चा संभालते हुए हर पत्रकार वार्ता में इस सवाल को उठाने से नहीं चूकते हैं।