रुद्रपुर। बाजपुर में नवजात की मौत के मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की जांच को 10 दिन पूरे हो चुके हैं लेकिन अब तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है और न ही जिम्मेदारी तय हो सकी है। मामले में जांच की गति और पारदर्शिता सवालों के घेरे में है।
स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ स्तर पर जांच समिति का गठन तो कर दिया लेकिन इस समिति की कार्यप्रणाली अब खुद संदेह के दायरे में आ रही है।
समिति ने सरकारी अस्पताल, निजी नर्सिंग होम और निजी अस्पताल तीनों स्तरों पर दस्तावेज जुटाए हैं लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर लापरवाही की स्पष्ट जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।
शिकायतकर्ता राजपाल पुत्र राजवीर का कहना है कि उनकी पत्नी नौ माह की गर्भवती थी। दो दिसंबर को प्रसव पीड़ा होने पर पहले बाजपुर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया जहां प्राथमिक जांच के बाद उन्हें शिवाय नर्सिंग होम रेफर कर दिया गया।
वहां मरीज को काफी समय तक रोके रखने के बाद बच्चेदानी रप्चर होने की बात कहकर सहारा अस्पताल भेजा गया, जहां ऑपरेशन हुआ, लेकिन नवजात की जान नहीं बचाई जा सकी।
जल्दबाजी में लिया गया फैसला न्यायसंगत नहीं
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष है कि जांच रिकॉर्ड, रेफरल स्लिप, उपचार टाइमलाइन और डॉक्टरों के बयान के आधार पर की जा रही है ताकि किसी निर्दोष को दोषी न ठहराया जाए। विभाग का मानता है कि मामला संवेदनशील है और जल्दबाजी में लिया गया फैसला न्यायसंगत नहीं होगा। 10 दिन का वक्त बीतने के बाद भी यदि यह तय नहीं हो पा रहा कि रेफरल में देरी हुई या नहीं, उपचार प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं तो यह जांच प्रक्रिया की दक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसूति मामलों में हर मिनट निर्णायक होता है यदि कहीं भी रेफरल में अनावश्यक देरी या जोखिम के बावजूद मरीज को रोके रखने जैसी स्थिति बनी तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
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एसीएमओ को इस गंभीर प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। -
डाॅ. केके अग्रवाल, सीएमओ
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- मुझे सीएमओ दफ्तर बुलाकर बयान दर्ज कराया गया था और पूछताछ भी अधिकारियों ने की थी लेकिन 10 दिन बाद भी कोई कार्रवाई अस्पतालों के खिलाफ नहीं हुई है।
-राजपाल, शिकायतकर्ता
सेक्टर 17 में निर्माणाधीन आईपीएस का निरीक्षण करती मेयर सुमन बहमनी व अन्य। प्रवक्ता