रुद्रपुर। रोडवेज डिपो के पास बीएस-4 मॉडल की बसों की जांच के लिए लैपटॉप तक उपलब्ध नहीं है। बसों में खराबी आने पर जांच के लिए मंडलीय कार्यशाला काठगोदाम पर निर्भर रहना पड़ता है।
इन गाड़ियों में लगे सेंसर की जांच लैपटॉप में फीड सॉफ्टवेयर से की जाती है। सेंसर से बस की खराबी का पता चलता है। जांच के अनुसार बस की खराबी दूर की जाती है। इस माॅडल की बसों में इंजन और अन्य खराबी आने पर मंडलीय कार्यशाला काठगोदाम से ऑपरेटर बुलाना पड़ता है। डिपो के पास न तो लैपटॉप है, न ऑपरेटर की ही तैनाती है।
लैपटाॅप और ऑपरेटर की कमी के कारण खराब बसें लंबे समय तक डिपो की कार्यशाला में खड़ी रहती हैं। वर्तमान में भी इस मॉडल की दो बसें मरम्मत के अभाव में कार्यशाला में खड़ी हैं।
बीते दिनों बस संख्या यूके 07पीए 4275 के डिस्कस फैन में खराबी आ गई थी जिसकी अब तक मरम्मत नहीं हो पाई है। बस संख्या यूके 04पीए 1158 इंजन में खराबी के कारण 12 दिन पूर्व से खड़ी हैं। डिपो के बेड़े में शामिल 39 बसों में से 22 बस बीएस-4 माॅडल की हैं जिनकी खराबी दूर करने में अक्सर दिक्कत आती है।
वर्जन
बीएस-4 मॉडल की बसों की सेंसर की जांच मंडलीय कार्यशाला से होती है। डिपो में लैपटॉप और ऑपरेटर की व्यवस्था नहीं है। लैपटॉप आवंटन और ऑपरेटर की तैनाती के लिए मुख्यालय प्रस्ताव भेजा जाएगा। - श्रीराम कौशल, सहायक महाप्रबंधक रोडवेज डिपो