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पंतनगर विवि से कृषि परास्नातक हैं नए विदेश सचिव क्वात्रा

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विनय मोहन क्वात्रा। - फोटो : RUDRAPUR
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पंतनगर। वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी विनय मोहन क्वात्रा भारत के नए विदेश सचिव होंगे। क्वात्रा अभी नेपाल में भारतीय राजदूत के पद पर हैं। विनय मोहन जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर के कृषि महाविद्यालय में 1980 बैच के छात्र रहे हैं और उन्होंने वर्ष 1985 तक विवि में शिक्षा ग्रहण की थी। उनकी मौसी के बेटे डॉ. जितेंद्र क्वात्रा पंतनगर विवि के कृषि विज्ञान केंद्र काशीपुर के प्रभारी हैं।
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डॉ. जितेंद्र ने बताया कि विनय मोहन ने पंत विवि से कृषि में स्नातक के बाद यहीं से एग्रोनॉमी में एमएससी की डिग्री पूरी की। इसके बाद उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए किया और पंजाब नेशनल बैंक में लोन अधिकारी के पद पर कुछ समय तक कार्यरत रहे। उन्हें बैंक की नौकरी नहीं भाई तो वह सविल सर्विसेज की तैयारी करने अपने घर दिल्ली चले गए और पहले प्रयास में ही भारतीय विदेश सेवा के लिए चयनित हो गए।
मूलत: पाकिस्तान से माइग्रेट विनय मोहन का परिवार बंटवारे के बाद दक्षिणी दिल्ली के पीतमपुरा में आकर बस गया था।
उन्होंने दिल्ली के ही सरकारी स्कूल से प्रारंभिक से इंटरमीडिएट तक शिक्षा हासिल की। विनय मोहन का विदेश सेवा में 32 साल कार्यकाल अभूतपूर्व रहा है। उन्होंने फ्रांस के राजदूत समेत कई प्रमुख पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। वह वाशिंगटन डीसी, जिनेवा, बीजिंग, दक्षिण अफ्रीका के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। बताया कि वर्तमान विदेश सचिव के सेवानिवृत्त होने के बाद विनय मोहन पहली मई को अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे।
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क्रिकेट के शौकीन क्वात्रा को शुरू से आईएफएस में रही रुचि
पंतनगर। पंतनगर विश्वविद्यालय में विनयमोहन के बैचमेट रहे प्राध्यापक डॉ. डीसी डिमरी और डॉ. सुनीता टी. पांडेय ने बताया कि हंसमुख व बेहद सरल स्वभाव के धनी विनय मोहन हमेशा दूसरों के सुख-दुख में शामिल रहते थे। उस दरम्यान प्रत्येक विभाग के दो बैच (हिंदी और अंग्रेजी) हुआ करते थे। 40 विद्यार्थियों के अंग्रेजी माध्यम बैच में सात छात्राएं थीं। विनय हमारे सहपाठी थे। विनय हमेशा क्लास में सबसे पीछे बैठते थे। वह क्लास में चल रहे लेक्चर के साथ ही आईएफएस की तैयारी भी करते रहते थे। उनकी एक खास बात यह थी कि उनके पैरों में हमेशा हवाई चप्पल ही होती थी। उन्हें क्रिकेट का बहुत शौक था। विदेश सेवा के दौरान वह किसी भी देश में रहे हों, आज भी व्हाट्सअप पर उनका रिप्लाई पांच से दस मिनट में आ जाता है। डॉ. सुनीता पांडेय ने बताया कि कई बार वह दिल्ली गईं और उन्हें फोन किया तो वह समय निकालकर जरूर आए और छात्र जीवन की यादें ताजा करते हुए सड़क किनारे ही खड़े होकर चाय पी। संवाद
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