नव तस्कर गिरोह के चंगुल से छुड़ाई गई नेपाली युवतियों के बयान कानून की पेचिदगियों की वजह से हुई देरी के चलते कोर्ट में दर्ज नहीं हो सके। डीएम ने पुलिस के आवेदन पर भाषा अनुवादक की नियुक्ति कर दी है। मंगलवार को कोर्ट में भाषा अनुवादक के जरिये ही युवतियों के बयान दर्ज होंगे। कोर्ट में बयान दर्ज होने के बाद ही युवतियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
बता दें कि पुलिस ने अरब देशों को भेजने के लिए ले जाई जा रही छह नेपाली युवतियों को गिरोह से मुक्त कराया था। मामले में एक महिला सहित तीन एजेंट जेल जा चुके हैं। पुलिस एजेंटों के संपर्क में रहने वाले गिरोह के बाकी सदस्यों की सुरागकशी में जुटी है। सोमवार को कोर्ट में युवतियों के 164 के बयान दर्ज होने थे। लेकिन हिंदी भाषा न जानने की वजह से उनके बयान दर्ज कराने को लेकर पुलिस में संशय बना रहा। पुलिस ने डीएम डॉ. नीरज खैरवाल से बयान दर्ज कराने के लिए भाषा अनुवादक को नियुक्त करने की मांग की। इसी प्रक्रिया में देरी की वजह से कोर्ट में बयान दर्ज कराने का समय निकल गया। पुलिस मंगलवार को कोर्ट में अनुवादक की मदद से युवतियों के बयान दर्ज कराएगी। एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए डीएम से भाषा अनुवादक की नियुक्ति के लिए कहा गया है। उन्होंने भाषा अनुवादक की नियुक्ति की है, जो स्वतंत्र है। इस प्रक्रिया को इसलिए अपनाया गया है ताकि बाद में सवाल खड़े न हों कि पुलिस ने खुद अनुवादक नियुक्त कर लिया। मंगलवार को मायती संस्था के लोग भी रुद्रपुर पहुंच रहे हैं। कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद युवतियों को उन्हें सौंपा जाएगा।
दिल्ली पुलिस और पुलिस मुख्यालय को भेजे नंबर
पुलिस को आरोपियों के मोबाइल से तस्कर गिरोह से जुड़े अरब देशों और नेपाल के लोगों के नंबर मिले थे। सूत्रों के मुताबिक बार्डर पर तैनात नेपाल पुलिस को इन नंबरों को देकर इनके संबंध में जानकारी लेने की तैयारी है। कुछ नंबर इस्तेमाल करने वाले लोगों के नेपाल से दिल्ली आने-जाने की सूचना भी मिली है। इसके चलते इन नंबरों को सर्विलांस टीम को दिया गया है। जैसे ही ये लोग बार्डर पार कर यूएसनगर में घुसेंगे तो दबोचा जा सकेगा। इसके अलावा वे ई-मेल आईडी भी दिल्ली पुलिस को दी गई हैं, जिनका इस्तेमाल तस्करी में होता है। एसएसपी डॉ. दाते ने बताया कि आरोपियों से मिले कुवैत, ओमान, दुबई और नेपाल के मोबाइल नंबरों को दिल्ली पुलिस के साथ ही देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय को भेजा गया है।
खटीमा के चूका पुल पर रहेगी विशेष नजर
पुलिस को आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि चंगुल से छुड़ाई गई तीन युवतियों को पकड़े जाने के डर से नेपाल बार्डर से लगे चूका पुल के रास्ते बाइक में खटीमा लगाया गया था। वहां से अन्य तीन युवतियों के साथ उन्हें रोडवेज में बिठाकर दिल्ली ले जाया जा रहा था। चूंकि चूका पुल का इस्तेमाल मानव तस्करी के लिए हो रहा है, इसलिए पुलिस भी विशेष नजर रखेगी। हालांकि दो महीने से भी अधिक समय से बनकर तैयार रिपोर्टिंग चौकी अभी शुरू नहीं हो सकी है। एसएसपी डॉ. दाते ने बताया कि तीन युवतियों को चूका पुल के रास्ते खटीमा लाने की बात सामने आई है। पूर्व में भी पुल से मानव तस्करी की जाती रही है। यह पुल केवल दोपहिया वाहनों के लिए ही है। बताया कि पुल से आने जाने वालों पर नजर रखी जाएगी। वहां बनी रिपोर्टिंग चौकी को जल्द शुरू करने की कार्रवाई की जा रही है। वहां बिजली का कनेक्शन नहीं होने की वजह से भवन पुलिस को हस्तांतरित नहीं हो पा रहा है। डीएम से कहकर चौकी में उरेडा के जरिए लाइट की व्यवस्था की जा रही है।
खटीमा पुलिस को सर्तकता बरतने के निर्देश
एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि मानव तस्करी की घटनाएं रोकने के लिए खटीमा पुलिस को विशेष रुप से सर्तक रहने के निर्देश दिए गए हैं। बताया गया है कि यदि समूह में नेपाली युवतियां रोडवेज बस में दिखाई पड़े तो उसको चेक कराएं।