पेराई सत्र 2015-16 में सहकारी चीनी मिलों में नादेही चीनी मिल चीनी उत्पादन (रिकवरी) में सबसे आगे रही है। प्राइवेट चीनी मिलों में हरिद्वार की लिव्वरहेड़ी की रिकवरी अन्य मिलों से ज्यादा रही है। रिकवरी में सबसे पीछे सहकारी चीनी मिल सितारगंज है।
जिस शुगर मिल की मशीनरी सही हो और ब्रेक डाउन कम हो, उसकी रिकवरी सबसे अधिक होती है। पिछले पेराई सत्र में सबसे अधिक रिकवरी वाले लिव्वरहेड़ी चीनी मिल ने 39.24 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की और 4,04,841 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया।
नादेही चीनी मिल ने 23.57 लाख क्विंटल गन्ना की पेराई की और 2,38,214 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। सहकारी चीनी मिलों में सितारगंज की रिकवरी 8.76, बाजपुर 10, नादेही की 10.11, किच्छा चीनी मिल की 9.63, डोईवाला 9.33 फीसदी रही।
हरिद्वार की प्राइवेट चीनी मिल लिव्वरहेड़ी की 10.32, इकबालपुर की 9.65, लक्सर की 9.61 फीसदी रिकवरी रही है। गन्ना आयुक्त के जनसंपर्क अधिकारी कमल जोशी ने कहा कि वर्ष 2015-16 में लिव्वरहेड़ी की रिकवरी सभी चीनी मिलों से अधिक है। वहीं सहकारी चीनी मिलों में नादेही की रिकवरी सबसे अधिक है।