रुद्रपुर। जीएसटी लागू होने के बाद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां एक ओर कर ढांचे में एकरूपता और कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है वहीं दूसरी ओर स्थानीय उद्योगों, छोटी वर्कशॉप और उभरते स्टार्टअप्स के लिए अनुपालन की जटिलता एक नई चुनौती बनकर उभरी है। रुद्रपुर के औद्योगिक परिदृश्य में इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही पहलू स्पष्ट नजर आ रहे हैं।
शहर के एक फर्नीचर निर्माण इकाई संचालक अमित गुप्ता का कहना है कि जीएसटी के बाद इंटर-स्टेट ऑर्डर लेना आसान हुआ है। पहले अलग-अलग टैक्स की उलझन रहती थी। अब बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट से हिसाब साफ रहता है। बताया कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस से जुड़ने में भी जीएसटी रजिस्ट्रेशन ने मदद की है जिससे सालाना कारोबार में बढ़ोतरी दिख रही है।
ऑटो रिपेयर वर्कशॉप संचालक सलीम खान का कहना है कि छोटे कारोबारियों के लिए हर माह रिटर्न फाइलिंग और अकाउंटेंट पर होने वाला खर्च चुनौती बन जाता है। तकनीकी जानकारी नहीं होने से बाहरी मदद लेनी पड़ती है जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ता है। कई बार पोर्टल की दिक्कतों से देरी और पेनल्टी का डर भी बना रहता है।
वर्जन
जीएसटी ने निसंदेह भारतीय बाजार को अधिक संगठित और प्रतिस्पर्धी बनाया है। हालांकि, ''''माइक्रो यूनिट्स'''' (सूक्ष्म इकाइयों) के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने की आवश्यकता है। अनुपालन जितना सरल होगा, छोटे उद्यमी उतना ही बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। - रमेश शंकर पांडेय, कर विशेषज्ञ