किच्छा के दरऊ ग्राम पंचायत में कथित वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। पौड़ी जेल में बंद ग्राम प्रधान नाजिया बी के डिजिटल हस्ताक्षर से ग्राम पंचायत के खाते से 10.37 लाख से अधिक की धनराशि निकाल ली गई। 14 अलग-अलग बिलों के माध्यम से यह राशि निकाली गई। पूरा खेल ग्राम प्रधान पति और बरेली दंगे में शामिल गफ्फार ने किया। मामले में ब्लाॅक के अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
बृहस्पतिवार को किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने प्रेसवार्ता कर बताया कि दरऊ की ग्राम प्रधान नाजिया बी 13 दिसंबर 2025 से पौड़ी जेल में हैं। इसके बावजूद उनके कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायत में किए गए कार्यों के प्रस्ताव भेजे गए और उन पर हस्ताक्षर भी किए गए। विधायक का आरोप है कि जब प्रधान जेल में थीं तब उनके डिजिटल हस्ताक्षर को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक स्तर पर निरस्त किया जाना चाहिए था ताकि किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन को रोका जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्लॉक प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा नहीं किया गया।
वित्तीय लेन-देन का विवरण
दिनांक राशि (रुपये में)
30 दिसंबर 28,000
5 जनवरी 10,500
7 जनवरी 11,655
14 जनवरी 1,53,537
14 जनवरी 1,86,641
14 जनवरी 1,72,483
3 फरवरी 88,129
3 फरवरी 2,14,750
3 फरवरी 10,580
17 फरवरी 11,700
17 फरवरी 7,060
24 फरवरी 46,500
24 फरवरी 49,500
24 फरवरी 49,500
धोखाधड़ी और गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज हैं कई मुकदमे
ग्राम प्रधान नाजिया बी के खिलाफ पूर्व में भी धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। उन्हें कोटद्वार से गिरफ्तार कर पौड़ी जेल भेजा गया था। उनके ऊपर तीन एफआईआर दर्ज हैं। इनमें एफआईआर संख्या 0173 (धारा 406, 420) और एफआईआर संख्या 0120 (धारा 420, 467, 468, 471) कोतवाली कोटद्वार में दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त, 2025 में एफआईआर संख्या 0060 (धारा 2/3 गैंगस्टर) भी दर्ज है। विधायक का दावा है कि नाजिया बी पर कोटद्वार में लोगों से संपत्ति के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले भी दर्ज हैं।
कार्रवाई न होने पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
विधायक बेहड़ ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के भीतर इस प्रकरण में ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे डीएम कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना देने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि जेल में बंद होने के बावजूद डिजिटल हस्ताक्षर और कथित फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से सरकारी धन का लेन-देन किया जाना डीएससी (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट) का घोर दुरुपयोग है। इस मामले में तत्काल दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी की जानी चाहिए।